शिक्षा मंत्रालय की नई कमान: कौन हैं प्रल्हाद जोशी, जिन्हें मिली मोदी सरकार की बड़ी जिम्मेदारी?
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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार में बड़ा फेरबदल हुआ है। राष्ट्रपति भवन के आदेशानुसार, अब प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस बदलाव के साथ ही जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन भी समाप्त हो गया है।

कौन हैं प्रल्हाद जोशी? कर्नाटक के धारवाड़ से छह बार के सांसद रहे प्रल्हाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में से एक हैं। उनका जन्म 1962 में हुआ था। जोशी न केवल एक कुशल संगठक माने जाते हैं, बल्कि वे लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से भी जुड़े रहे हैं। राजनीति में आने से पहले वे एक व्यवसायी के रूप में भी सक्रिय थे।

राजनीतिक सफर और उपलब्धियां प्रल्हाद जोशी पहली बार 2004 में लोकसभा पहुंचे थे और तब से लगातार धारवाड़ सीट पर अपना दबदबा बनाए हुए हैं। वे 2014 से 2016 तक कर्नाटक बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 2019 से 2024 के बीच उन्होंने कोयला, खनन और संसदीय कार्य जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों को संभाला है। अब उनके पास शिक्षा मंत्रालय के साथ-साथ उपभोक्ता मामले और नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का भी कार्यभार है।

पूर्व मंत्री पर क्या बोले जोशी? कार्यभार संभालने के बाद जोशी ने धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधान के नेतृत्व में नई शिक्षा नीति (NEP 2020) का सफल कार्यान्वयन हुआ और शिक्षा क्षेत्र में 100 से अधिक बड़े-छोटे सुधार किए गए। उन्होंने अपनी नई भूमिका को विनम्रता के साथ स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में पूरी क्षमता से काम करने का संकल्प लिया।

छात्र संगठनों की क्या हैं उम्मीदें? शिक्षा मंत्रालय की नई जिम्मेदारी मिलते ही छात्र समूहों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। सीजेपी के सौरव दास ने कहा कि नए मंत्री पर युवाओं की नजर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार और आंदोलनकारी गुट के बीच एक महीने के भीतर बैठक का वादा किया गया है। युवाओं की मुख्य मांगें पेपर लीक पर लगाम लगाना और व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है।

संपत्ति और वित्तीय स्थिति 2024 के चुनाव हलफनामे के मुताबिक, प्रल्हाद जोशी और उनकी पत्नी के पास करोड़ों की चल और अचल संपत्ति है। इसमें बेंगलुरु और हुबली में आवासीय अपार्टमेंट और प्लॉट शामिल हैं। हालांकि, उन पर बैंकों और सरकारी संस्थाओं की भी कुछ देनदारियां मौजूद हैं। अब देखना यह है कि अनुभवी नेता प्रल्हाद जोशी शिक्षा विभाग की चुनौतियों, विशेषकर पेपर लीक और NEP के कार्यान्वयन को किस तरह संभालते हैं।

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