नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों से तीखी बहस करते नजर आ रहे हैं। यह घटना 21 जुलाई की है।
क्या है वायरल वीडियो का सच? वीडियो में वांगचुक अस्पताल के अधिकारियों से यह सवाल करते दिख रहे हैं कि उन्हें बाहर जाने से क्यों रोका जा रहा है। उन्होंने प्रशासन को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उन्हें नजरबंद करना है, तो उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया जाए, अन्यथा उन्हें अस्पताल से जाने दिया जाए। वांगचुक ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इस तनाव के कारण उनकी तबीयत बिगड़ती है, तो इसका पूर्ण उत्तरदायित्व संबंधित अधिकारियों का होगा।
हाई कोर्ट का आदेश और विवाद यह घटना तब हुई जब दिल्ली हाई कोर्ट ने वांगचुक को उनकी पसंद के अस्पताल (मेदांता) में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था। इससे पहले, जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के दौरान तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वे भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे थे।
अस्पताल प्रशासन की चुप्पी वायरल वीडियो के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद उन्हें अस्पताल से निकलने से क्यों रोका गया? हालांकि, इस मामले पर न तो अस्पताल प्रशासन और न ही दिल्ली पुलिस की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी किया गया है।
सोशल मीडिया पर बंटे विचार वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। वांगचुक के समर्थकों का कहना है कि एक नागरिक की स्वतंत्रता का हनन किया जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर सोशल मीडिया का एक धड़ा उनकी शारीरिक गतिविधियों पर सवाल उठाते हुए इसे प्रदर्शन का हिस्सा बता रहा है।
लोकतंत्र और सुरक्षा के बीच उलझन यह मामला प्रशासनिक जिम्मेदारी और प्रदर्शनकारी के अधिकारों के बीच के बारीक संतुलन को फिर से चर्चा में ले आया है। जब कोई आंदोलनकारी स्वास्थ्य कारणों से अस्पताल में भर्ती होता है, तो उसकी चिकित्सा सुरक्षा और उसकी निजी स्वतंत्रता के बीच प्रशासन के सामने अक्सर ऐसी चुनौतीपूर्ण स्थितियां पैदा हो जाती हैं। फिलहाल, पूरे मामले पर आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है।
This is the video from Safdarjung hospital in Delhi where Sonam Wangchuk was under medical observation. After the high court order, he was leaving for Medanta when Safdarjung hospital staff tried to stop him on July 21.
— Piyush Rai (@Benarasiyaa) July 25, 2026
Right wing narrative: Look he is so fit. Walking around… pic.twitter.com/V9qWdXzr3J
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