इस्तीफा: नीट पेपर लीक और Gen-Z के आक्रोश के आगे झुकी सरकार, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छोड़ा पद
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नई दिल्ली: देश में नीट (NEET) पेपर लीक और उसके बाद मचे बवाल के बीच बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में युवाओं और छात्रों द्वारा किए जा रहे तीव्र आंदोलन के आगे सरकार को झुकना पड़ा है।

एक्स (ट्विटर) पर दी इस्तीफे की जानकारी धर्मेंद्र प्रधान ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अपने इस्तीफे की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप दिया है। प्रधान ने कहा कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं से वे बेहद दुखी हैं और उन्होंने इस स्थिति की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने का निर्णय लिया है।

व्यक्तिगत प्रतिष्ठा से ऊपर राष्ट्र अपने विदाई संदेश में प्रधान ने कहा, यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। मैं चाहता हूं कि जंतर-मंतर पर बनी स्थिति का लाभ राष्ट्र विरोधी ताकतें न उठाएं। उन्होंने चार दशकों से शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहने की बात दोहराते हुए कहा कि वे हमेशा से युवाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करते आए हैं।

CJP की बड़ी जीत: दुनिया झुकती है, झुकाने वाला चाहिए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने इसे लोकतंत्र की जीत करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा कि नीट पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों को आखिरकार न्याय मिला है। उन्होंने जोर देकर कहा, दुनिया झुकती है, बस झुकाने वाला चाहिए।

क्या थीं CJP की प्रमुख मांगें? CJP ने स्पष्ट कर दिया था कि वे शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से कम पर कोई समझौता करने को तैयार नहीं थे। संगठन की अन्य मांगों में प्रदर्शनकारी छात्रों की बर्बर पिटाई के लिए सार्वजनिक माफी और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देना शामिल है।

सरकार पर था चौतरफा दबाव नीट पेपर लीक को लेकर केवल छात्र ही नहीं, बल्कि कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष भी सरकार पर हमलावर था। भारी विरोध को देखते हुए सरकार ने पहले ही सीबीआई जांच, री-एग्जाम और फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन का आश्वासन दिया था। जेपी नड्डा के साथ हुई बैठक में मुआवजे और दर्ज एफआईआर वापस लेने पर भी सरकार ने सैद्धांतिक सहमति जताई थी।

राजनीतिक घटनाक्रम में एक अहम मोड़ पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार के कार्यकाल में यह पहला मौका है जब किसी बड़े आंदोलन के दबाव में किसी मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा है। सीएए (CAA) से लेकर किसान आंदोलन तक सरकार ने अपने स्टैंड से पीछे हटने के संकेत कम ही दिए थे, लेकिन Gen-Z के इस आक्रामक रुख ने राजनीतिक समीकरणों को बदलने पर मजबूर कर दिया है।

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