शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: सोनम वांगचुक बोले - यह लोकतंत्र और सड़कों पर उतरे युवाओं की जीत
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नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देश की राजनीति और शिक्षा जगत में हलचल तेज हो गई है। नीट (NEET) परीक्षा में सामने आई कथित अनियमितताओं के बीच प्रधान का यह कदम एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

सोनम वांगचुक का तीखा प्रहार प्रसिद्ध शिक्षाविद और कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लोकतंत्र की जीत करार दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने इसे सीधे सड़कों से निकले प्रत्यक्ष लोकतंत्र का परिणाम बताया।

वांगचुक ने लिखा, यह शांति, धैर्य और निरंतर संघर्ष की जीत है। मैं उन सभी नागरिकों, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और देश की जेन-जी (Gen Z) पीढ़ी को बधाई देता हूं, जिन्होंने डर के माहौल को पीछे छोड़कर अपनी आवाज बुलंद की।

अब सुधारों की बारी जवाबदेही तय होने के बाद अब सोनम वांगचुक ने सरकार से आगे के सुधारों की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल इस्तीफा काफी नहीं है, बल्कि शिक्षा प्रणाली में आमूल-चूल सुधार समय की मांग है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को दोहराया न जा सके।

जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए वांगचुक ने इसे युवाओं के आत्मसम्मान की लड़ाई बताया।

धर्मेंद्र प्रधान बोले- राष्ट्रसेवा मेरी प्राथमिकता इससे पहले, अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अपने चार दशकों के राजनीतिक करियर का जिक्र करते हुए कहा कि वे हमेशा युवाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करते रहे हैं।

प्रधान ने स्वीकार किया कि नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ियां हुई थीं। उन्होंने कहा कि सरकार ने मामले की गंभीरता को समझते हुए इसे सीबीआई को सौंपा, परीक्षा रद्द की और अब इसे कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में ले जाने का निर्णय लिया है।

जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटा अपने इस्तीफे के संदेश में प्रधान ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पूरी घटना की नैतिक जिम्मेदारी ली है और कभी इससे पीछे नहीं हटे। उन्होंने कहा कि उनका एकमात्र उद्देश्य परीक्षा माफियाओं के चंगुुल से मेधावी छात्रों को बचाना था।

उन्होंने आगे कहा, यह मामला मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि देश के भविष्य का है। मैं नहीं चाहता कि युवा किसी अनावश्यक राजनीतिक टकराव या कानूनी विवाद में उलझें। छात्रों के हितों की रक्षा और उनकी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर देने के उद्देश्य से ही उन्होंने पद छोड़ने का कठिन निर्णय लिया है।

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