# शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: कॉकरोच जनता पार्टी ने केंद्र को याद दिलाईं दो बड़ी मांगें
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देश भर में पेपर लीक के खिलाफ छिड़े संग्राम के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रधान ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक भावुक संदेश साझा करते हुए अपने इस्तीफे की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ा।

हमने कर दिखाया : अभिजीत दिपके का दावा प्रधान के इस्तीफे के बाद इस आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दिपके ने इसे लोकतंत्र की जीत करार दिया है। दिपके ने कहा, पिछले एक महीने से लोग कहते थे कि यह सरकार झुकने वाली नहीं है, लेकिन मैंने कहा था कि हर कोई झुकता है, बस झुकाने वाला होना चाहिए।

दो और बड़ी मांगें बाकी इस्तीफे से उत्साहित दिपके ने स्पष्ट किया कि आंदोलन अभी थमा नहीं है। उन्होंने सरकार के सामने दो प्रमुख मांगें मजबूती से रखी हैं:

  1. नीट (NEET) पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
  2. छात्रों पर बल प्रयोग करने वाले पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई हो और प्रदर्शनकारी छात्रों से दर्ज केस वापस लिए जाएं।

क्या भागवत के बयान का दिखा असर? दिलचस्प बात यह है कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के एक बयान के ठीक चार घंटे बाद आया। भागवत ने सुबह कहा था कि सत्ता के अहंकार में मनमानी नहीं चल सकती और नई पीढ़ी से संवाद जरूरी है। वहीं, इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान का इतिहास भी ऐसे ही संघर्षों से जुड़ा रहा है। 1997 में ओडिशा में पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए उन्हें भी पुलिस की लाठियां खानी पड़ी थीं।

NTA में बड़े बदलाव की तैयारी इस्तीफे से पहले सरकार ने पिछले 24 घंटों में बड़े प्रशासनिक कदम उठाए हैं। शुक्रवार रात नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया, जिन पर आपराधिक केस दर्ज करने की तैयारी है। शिक्षा मंत्रालय में भी सचिव स्तर पर फेरबदल किए गए हैं। सरकार अब आउटसोर्सिंग व्यवस्था खत्म कर तकनीकी सुधारों और नई नियुक्तियों के जरिए भविष्य में पेपर लीक की संभावनाओं को पूरी तरह खत्म करने का दावा कर रही है।

लोकतंत्र की जीत शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए सोनम वांगचुक ने भी इसे शांति, धैर्य और दृढ़ संकल्प की विजय बताया है। फिलहाल दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर देश के कोने-कोने तक छात्र अब अपनी बाकी मांगों को लेकर सरकार के अगले कदम के इंतजार में हैं।

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