दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 36 दिनों से जारी छात्रों का आंदोलन आखिरकार अपने अंजाम तक पहुंच गया है। नीट (NEET) पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ यह प्रदर्शन भूख हड़ताल से होता हुआ हिंसा और फिर एक बड़े राजनीतिक बदलाव पर जाकर थमा।
नीट पेपर लीक और छात्रों की निराशा विरोध की शुरुआत 3 मई 2026 को हुई नीट-यूजी परीक्षा के पेपर लीक के साथ हुई। 22 लाख छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया। जब 12 मई को परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया, तो छात्रों में मायूसी छा गई। री-एग्जाम की घोषणा तक मानसिक तनाव के कारण 17-20 छात्रों ने आत्महत्या जैसा घातक कदम उठा लिया, जिससे देशभर के छात्रों का गुस्सा सड़कों पर उमड़ पड़ा।
भूख हड़ताल से गूंजा जंतर-मंतर सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह आक्रोश जंतर-मंतर के मंच तक पहुंच गया। छात्रों के साथ सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) भी धरने पर बैठ गए। आंदोलन का मुख्य केंद्र बिंदु शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा था। धीरे-धीरे यह प्रदर्शन अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल में तब्दील हो गया।
सोनम वांगचुक का अनशन और स्वास्थ्य संकट आंदोलन के दौरान सोनम वांगचुक ने 20 दिनों से अधिक समय तक अनशन किया। उनकी मांग थी कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न हो और न ही उन पर एफआईआर दर्ज की जाए। बिगड़ते स्वास्थ्य के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां सरकार से आश्वासन मिलने के बाद 26 दिनों के लंबे उपवास के बाद उन्होंने अपना अनशन तोड़ा।
शांति से हिंसा की ओर बढ़ता आक्रोश जैसे ही सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया, विरोध-प्रदर्शन का स्वरूप बदलने लगा। छात्रों को जंतर-मंतर खाली करने का निर्देश दिया गया, जिसके बाद नारेबाजी शुरू हो गई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि मामला शांतिपूर्ण प्रदर्शन से हिंसा और पुलिस लाठीचार्ज तक पहुंच गया। राजनीति और सांप्रदायिक रंग लेने के कारण यह मुद्दा संसद तक गूंजने लगा।
पीएम मोदी का हस्तक्षेप और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा दबाव बढ़ता देख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को वीडियो संदेश जारी कर भरोसा दिलाया कि पेपर लीक मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाया जाएगा। लंबी जद्दोजहद और 36 दिनों के निरंतर विरोध के बाद, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को आधिकारिक रूप से अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ ही छात्रों और प्रदर्शनकारी संगठनों में जीत की खुशी देखी गई। यह आंदोलन न केवल एक परीक्षा की नाकामी के खिलाफ था, बल्कि यह देश की पूरी शिक्षा नीति में सुधार की एक बड़ी मांग बन गया था।
— Dharmendra Pradhan (@dpradhanbjp) July 25, 2026
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