पेपर लीक पर इस्तीफे से हल नहीं निकलेगा: रामदास अठावले ने बताया क्यों जरूरी है कानून
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केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने हाल ही में जारी छात्र आंदोलनों और पेपर लीक के मुद्दे पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। अठावले ने साफ किया कि केवल इस्तीफे मांगना समाधान नहीं है, बल्कि समस्या की जड़ पर प्रहार करने के लिए कड़े कानूनों की जरूरत है।

इस्तीफा विकल्प क्यों नहीं? अठावले ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कहा, धर्मेंद्र प्रधान अगर इस्तीफा भी दे देते हैं, तो सवाल यह बना रहता है कि पेपर लीक को आखिर रोकेगा कौन? समस्या इस्तीफे में नहीं, बल्कि सिस्टम में है। सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाने का निर्णय लिया है।

छात्रों की मांगों पर सकारात्मक रुख मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार छात्रों की मांगों के प्रति गंभीर है। उन्होंने कहा, बातचीत से हर रास्ता निकल सकता है। यदि छात्रों की मांगों पर चर्चा होती है, तो गिव एंड टेक (लेन-देन) की स्थिति बन सकती है। दोनों पक्षों को सामंजस्य बिठाने की जरूरत है। सरकार सकारात्मक रूप से विचार करने को तैयार है।

सोनम वांगचुक का अनशन और सरकारी पहल सोनम वांगचुक के मुद्दे पर अठावले ने बताया कि उनके स्वास्थ्य में काफी गिरावट आ गई थी, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उन्होंने कहा, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने उनसे मुलाकात की और अनशन खत्म करवाया। सरकार बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाने का प्रयास कर रही है।

पेपर लीक माफियाओं पर होगी कड़ी कार्रवाई अठावले ने नीट (NEET) पेपर लीक पर दुख जताते हुए कहा कि जो हुआ वह बेहद गलत था। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस चलाने की घोषणा की है। उनकी पार्टी की स्पष्ट मांग है कि पेपर लीक करने वाले दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

पुलिस कार्रवाई की जांच जरूरी हाल ही में रेल भवन के पास प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर अठावले ने चिंता जताई। उन्होंने कहा, पुलिस का छात्रों पर लाठीचार्ज करना बिल्कुल भी उचित नहीं है। इस पूरी घटना की जांच हो रही है। छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हक है और उन्हें न्याय मिलना चाहिए। मुझे विश्वास है कि यह आंदोलन जल्द ही शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो जाएगा।

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