नई दिल्ली: 26 दिनों तक चला सोनम वांगचुक का अनशन केंद्र सरकार के आश्वासन के बाद समाप्त हो गया। लेकिन, जैसे ही उन्होंने अपना उपवास तोड़ा, सोशल मीडिया पर सक्रिय इस्लामी-वामपंथी समूहों ने उन पर तीखे हमले शुरू कर दिए। कभी हीरो माने जाने वाले वांगचुक अब इन समूहों की नजर में गद्दार और समझौतावादी बन गए हैं।
सरकार से मिला ठोस आश्वासन सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में अपना 26 दिवसीय अनशन खत्म किया। वांगचुक ने स्पष्ट किया कि उन्हें सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों से आश्वासन मिला है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और NEET पेपर लीक पर संसद में चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की भी बात कही गई है।
प्लांट और धोखे के आरोप अनशन खत्म होते ही सोशल मीडिया पर एक वर्ग वांगचुक के खिलाफ एकजुट हो गया। कई यूजर्स ने आरोप लगाया कि वांगचुक को एक प्लान के तहत अनशन पर बैठाया गया था। एक यूजर ने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें राम मंदिर चोरी और एथेनॉल विवाद से ध्यान भटकाने के लिए इस्तेमाल किया गया। वहीं, कुछ लोगों ने उन पर जेन-जी (Gen-Z) के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया है।
सत्ता परिवर्तन का छिपा एजेंडा? इस्लामी-वामपंथी समूहों की प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट हो रहा है कि वे अब शिक्षा सुधार से आगे बढ़कर एक बड़े राजनीतिक एजेंडे पर केंद्रित हैं। जाहिद जावली जैसे यूजर्स ने खुलेआम कहा कि यह आंदोलन अब वांगचुक जैसे नेताओं के हाथ से निकल चुका है और इसका एकमात्र उद्देश्य सत्ता परिवर्तन है। यह संकेत है कि आंदोलन का असली चेहरा अब छात्रों की मांगों से हटकर सरकार विरोधी प्रोपेगेंडा की ओर मुड़ गया है।
हिंदू विरोधी सोच का प्रदर्शन आलोचना के नाम पर कुछ यूजर्स ने हताशा में आकर हिंदू गौरव और राष्ट्रवाद का भी मजाक उड़ाया। वांगचुक को भाजपा में शामिल होने की सलाह देकर उनका उपहास किया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि आंदोलन के समर्थकों का एक तबका किस प्रकार की वैचारिक कट्टरता से ग्रसित है। ऑल्ट न्यूज के प्रतीक सिन्हा ने भी तंज कसते हुए लिखा कि अब उनकी जरूरत नहीं है, जो यह दर्शाता है कि जब तक वांगचुक ने उनके प्रोपेगेंडा का साथ दिया, वे उपयोगी थे, लेकिन सरकार से संवाद स्थापित करते ही वे बेकार हो गए।
आंदोलन की दिशा पर सवाल यह घटनाक्रम साफ करता है कि जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह प्रदर्शन कैसे धीरे-धीरे छात्रों के हितों से भटककर राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने का जरिया बनता जा रहा है। शांतिपूर्ण सुधार की मांग करने वाले वांगचुक पर हुआ यह हमला उन तत्वों को बेनकाब करता है, जो वास्तव में व्यवस्था में सुधार के बजाय देश में अराजकता और सत्ता परिवर्तन के लिए युवाओं के कंधे का इस्तेमाल कर रहे हैं।
Just now in the presence of Union Ministers Sh. JP Nadda, Dr. Jitendra Singh and the senior leaders of Apex Body of Leh Ladakh I finally broke my fast after 26 days. Earlier 65 members of parliament from different political parties had visited or signed letters urging me to break… pic.twitter.com/RFCet7Oksy
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 23, 2026
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