ईरान पर अमेरिका का जोरदार प्रहार: लगातार 13वीं रात दहल उठा होर्मुज, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया संकट
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मध्य पूर्व में जारी तनाव अपने चरम पर है। समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष लगातार 13वीं रात भी जारी रहा। अमेरिकी सेना ने ईरान के प्रमुख सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना युद्ध का केंद्र अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ये हमले होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने के लिए किए गए। केश्म, बंदर अब्बास, अंदीमेश्क और ओमीदियेह समेत कई इलाकों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। अमेरिका का लक्ष्य इन हमलों के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की बहाली सुनिश्चित करना है।

हूती विद्रोहियों की धमकियों से बढ़ी चिंता इस बीच, ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमले का दावा किया है। हूतियों ने अन्य महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को भी बंद करने की धमकी दी है, जिससे वैश्विक बाजारों में खलबली मच गई है। इस तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है और भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।

डोनाल्ड ट्रंप की दो टूक: ईरान को भुगतना होगा परिणाम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि हूती विद्रोही जहाजों पर हमले जारी रखते हैं, तो अमेरिका इसके लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराएगा। ट्रंप ने कहा कि ईरान की प्रतिबंधित निधियों का इस्तेमाल युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई के लिए किया जाएगा।

शांति की कोशिशें और संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जायदी ने तेहरान पहुंचकर मध्यस्थता की पेशकश की है और आश्वासन दिया है कि इराक की जमीन का इस्तेमाल हमलों के लिए नहीं होगा। वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने सुरक्षा परिषद में चिंता जताते हुए कहा कि क्षेत्र एक खतरनाक दुष्चक्र में फंस चुका है और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है।

मानवीय संकट और बुनियादी ढांचा निशाने पर ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 27 जून से जारी इन हमलों में अब तक 55 लोग मारे गए हैं और 629 घायल हुए हैं। जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों के ऊर्जा प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण विलवणीकरण संयंत्रों (Desalination Plants) को निशाना बनाया है, जिससे इन देशों में पेयजल संकट गहराने का खतरा पैदा हो गया है।

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