NEET विवाद: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जवाबदेही की पहली सीढ़ी , प्रियंका चतुर्वेदी ने सरकार को घेरा
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NEET पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। जंतर-मंतर पर जारी छात्रों के प्रदर्शन के बीच शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। उन्होंने इसे सरकार की जवाबदेही तय करने का पहला कदम बताया है।

जनता की सरकार का संदेश जरूरी प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा यह साबित करेगा कि सरकार वाकई जनता के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने कहा, कड़े कदम उठाने का एक समय होता है, वह समय अब निकल चुका है। यह कार्रवाई पहले ही होनी चाहिए थी, न कि तब जब छात्रों का आक्रोश सड़कों पर उमड़ आया है।

चर्चा का ढोंग? कार्रवाई की गारंटी गायब सरकार द्वारा NEET मुद्दे पर बहस के लिए तैयार होने के दावे पर चतुर्वेदी ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बहस (Discussion) होने से कार्रवाई की गारंटी नहीं मिलती। उनके अनुसार, सरकार सिर्फ चर्चा का समय दे रही है, लेकिन कोई ठोस रोडमैप या शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर चुप्पी बनाए हुए है। यह बहस सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप में सिमट कर रह जाएगी।

छात्रों की तीन प्रमुख मांगें चतुर्वेदी ने छात्रों का पक्ष रखते हुए तीन मुख्य मांगें गिनाईं:

  1. बल प्रयोग बंद हो: प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ आंसू गैस और लाठीचार्ज का विरोध।
  2. जवाबदेही: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, ताकि सरकार की विश्वसनीयता बहाल हो सके।
  3. सिस्टम में सुधार: पिछले 15 वर्षों में 152 पेपर लीक होने के बावजूद किसी भी आरोपी को सजा न मिलना गंभीर है। छात्र पारदर्शी परीक्षा प्रणाली चाहते हैं।

पीएम के आश्वासनों पर उठते सवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक्स (पूर्व ट्विटर) पोस्ट का जिक्र करते हुए प्रियंका ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों से सरकार बार-बार फास्ट ट्रैक कोर्ट और सख्त कार्रवाई की बात कह रही है, लेकिन जमीनी हकीकत नहीं बदली। अप्रैल और जुलाई 2024 के बयानों को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि अब सिर्फ आश्वासनों से लोगों का भरोसा नहीं जीता जा सकता।

संसद में गतिरोध पर चिंता अपने वीडियो एपिसोड पार्लियामेंट्री पीसी में उन्होंने संसद में जारी गतिरोध पर भी अफसोस जताया। उन्होंने कहा कि शून्यकाल (Zero Hour) और प्रश्नकाल (Question Hour) जैसे महत्वपूर्ण हिस्से बाधित हो रहे हैं, जो जनता के मुद्दों को उठाने का सबसे सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल और सत्ता पक्ष को मिलकर काम करना चाहिए, लेकिन इसके लिए सरकार को छात्रों और विपक्ष की मांगों को गंभीरता से सुनना होगा।

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