पेपर लीक मामलों में दोषियों को सख्त और त्वरित सजा दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा ऐलान किया है। सरकार ने इसके लिए ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, लेकिन कानून बनने की प्रक्रिया महज घोषणा या ड्राफ्ट से पूरी नहीं होती। आइए समझते हैं कि इस कानून के दायरे में आने में अभी कितनी बाधाएं बाकी हैं।
कानून बनाने की प्रक्रिया का पहला चरण केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी है। फिलहाल, अधिकारियों द्वारा तैयार ड्राफ्ट की कैबिनेट कानूनी, प्रशासनिक और वित्तीय समीक्षा करेगी।
कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद विधेयक को संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में पेश किया जाएगा। यहाँ सांसदों के बीच चर्चा होगी और जरूरत पड़ने पर इसे संसदीय समिति के पास भी भेजा जा सकता है।
संसद में किसी भी साधारण विधेयक (Ordinary Bill) को पास कराने के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत की आवश्यकता होती है। यदि सरकार के पास दोनों सदनों में पर्याप्त संख्या बल नहीं है, तो विपक्ष बिल में संशोधन की मांग कर सकता है या प्रक्रिया को लंबा खींच सकता है। विशेष रूप से राज्यसभा में गणित सरकार के लिए हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा है।
संसद में बहस के दौरान विपक्ष कई सवाल उठा सकता है, जो इस कानून के भविष्य को प्रभावित करेंगे:
संसद के दोनों सदनों में बिल पारित होने के बाद यह राष्ट्रपति के पास जाता है। उनकी मंजूरी के बाद ही यह कानून का रूप लेता है। लेकिन कानून बनने के तुरंत बाद कोर्ट शुरू नहीं होते। इसके लिए जजों की नियुक्ति, बजट आवंटन, नियमों की अधिसूचना और न्यायपालिका के साथ समन्वय जैसी प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं, जिसमें समय लग सकता है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 के तहत मामलों की सुनवाई के लिए पहले ही फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित कर दी है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि केवल सजा का डर काफी नहीं है। परीक्षा प्रणाली में सुरक्षा, डिजिटल निगरानी और संस्थागत सुधार भी उतने ही अनिवार्य हैं।
फिलहाल, सरकार का लक्ष्य संसद के मौजूदा सत्र में ही विधेयक को पारित कराना है, लेकिन सदन के अंदर की राजनीति ही तय करेगी कि यह कानून कितनी जल्दी धरातल पर उतरेगा।
Delhi High Court has constituted a new Fast Track Court to hear cases under the Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024, with immediate effect.#FastTrackCourts#NEET @DDNewslive @MIB_India pic.twitter.com/1YBtvI6zCH
— PIB India (@PIB_India) July 23, 2026
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