10-15 छात्रों की जान लेने की थी साजिश? पूर्व रॉ एजेंट का CJP लीडरशिप पर सनसनीखेज खुलासा
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नई दिल्ली: पूर्व रॉ एजेंट लकी बिष्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की शीर्ष लीडरशिप पर गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। बिष्ट का दावा है कि 20 जुलाई को आयोजित संसद चलो मार्च महज एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक गहरी साजिश का हिस्सा था, जिसका मकसद मासूम छात्रों को बलि का बकरा बनाना था।

क्या थी खूनी साजिश? लकी बिष्ट ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर दावा किया कि सीजेपी नेताओं की योजना छात्रों को उकसाकर संसद भवन तक ले जाने की थी। उनका मकसद था कि वहां तैनात पैरामिलिट्री फोर्स मजबूरन फायरिंग करे। बिष्ट के अनुसार, इस साजिश का लक्ष्य 10-15 छात्रों की जान लेना था, ताकि इसका पूरा दोष सुरक्षा बलों पर मढ़ा जा सके।

झूठ का पर्दाफाश बिष्ट ने वीडियो में सीजेपी नेता अभिजीत दिपके के दावों को झूठा बताया है। दिपके ने दावा किया था कि पार्टी के अन्य नेताओं को हाउस अरेस्ट कर लिया गया था और उनसे मोबाइल छीन लिए गए थे। इसके जवाब में लकी बिष्ट ने एक तस्वीर साझा की, जिसमें संबंधित नेता जेपी नड्डा के साथ बैठे हैं और उनके हाथों में मोबाइल साफ देखे जा सकते हैं।

छात्रों से छिपाई गई बातचीत पूर्व रॉ एजेंट का कहना है कि सरकार की ओर से इन नेताओं से बातचीत पहले ही तय हो गई थी। लेकिन, पार्टी नेताओं ने जानबूझकर छात्रों से यह बात छिपाई। उन्होंने छात्रों को अंधेरे में रखा ताकि आंदोलन को हिंसक रूप दिया जा सके और राजनीतिक रोटियां सेंकी जा सकें।

कैसे रची गई सुरक्षा घेराबंदी? बिष्ट ने आरोप लगाया कि सीजेपी के नेताओं ने अपनी सुरक्षा के लिए पहले ही इंतजाम कर लिए थे। एक नेता अपनी वीडियोग्राफी करवा रहे थे, दूसरे जेपी नड्डा के साथ सुरक्षित बैठे थे, और तीसरे को मेट्रो लाइन के पास रहने को कहा गया ताकि सीसीटीवी में उनकी उपस्थिति दर्ज हो सके। इन सबने खुद को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए पहले ही सेफ पैसेज तैयार कर लिया था।

सवाल जो अनुत्तरित हैं लकी बिष्ट ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है: यदि वे नेता सुरक्षित थे और बातचीत की प्रक्रिया चल रही थी, तो फिर छात्रों को उकसाकर संसद की ओर क्यों धकेला गया? बिष्ट ने साफ कहा कि यह किसी भी तरह से जन आंदोलन नहीं, बल्कि बच्चों की जान के साथ खेला गया एक खतरनाक राजनीतिक दांव था।

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