लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारों के पैरोकार सोनम वांगचुक ने अपना अनिश्चितकालीन अनशन खत्म करने के संकेत दिए हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह को एक खुला पत्र लिखकर सरकार के सामने वार्ता के रास्ते खोल दिए हैं।
ठोस आश्वासन की शर्त वांगचुक ने स्पष्ट किया है कि वे अपना अनशन तभी खत्म करेंगे, जब सरकार उनकी मांगों पर लिखित और स्पष्ट आश्वासन देगी। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से सकारात्मक कदम उठाए जाने पर ही वे आगे की रणनीति तय करेंगे।
छात्रों के खिलाफ कार्रवाई पर चिंता पत्र में सबसे अहम मांग प्रदर्शनकारी छात्रों की सुरक्षा को लेकर है। वांगचुक ने सरकार से मांग की है कि आंदोलन में शामिल युवाओं के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई न की जाए। उन्होंने कहा कि बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग करना छात्रों का लोकतांत्रिक अधिकार है, न कि कोई अपराध।
क्या है प्रमुख मांगें? वांगचुक ने उन मुद्दों को दोहराया है जो लंबे समय से विवाद का केंद्र बने हुए हैं:
शांतिपूर्ण प्रदर्शन और पुलिस बल 20 जुलाई को हुए चलो संसद मार्च का उल्लेख करते हुए वांगचुक ने पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार आगे से आंदोलन को दबाने के लिए अत्यधिक पुलिस बल का इस्तेमाल नहीं करेगी और छात्रों पर दर्ज होने वाले मुकदमों से परहेज करेगी।
बातचीत का रास्ता खोलने की पहल सोनम वांगचुक ने भरोसा दिलाया है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन देती है, तो वे स्वयं शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों से आंदोलन को फिलहाल रोकने की अपील करेंगे। उनका उद्देश्य सरकार और छात्रों के बीच संवाद का एक ऐसा मंच तैयार करना है जिससे समाधान निकल सके।
लोकतंत्र और युवाओं का भविष्य अपने पत्र के अंत में वांगचुक ने कहा कि लोकतंत्र की असली परीक्षा असहमति रखने वाले युवाओं के प्रति सरकार के व्यवहार से होती है। उन्होंने संदेश दिया कि देश का भविष्य उन युवाओं की आवाज सुनने में ही निहित है, जो साहस और उम्मीद के साथ शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे हैं।
अब सबकी नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या इस संकट का समाधान बातचीत के जरिए निकल पाएगा या नहीं।
AN APPEAL TO THE GOVERNMENT
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 22, 2026
regarding breaking my fast…
Once the assurance from govt come I will also appeal to the peacefully protesting students to halt the movement for now and enter into dialogue with the government pic.twitter.com/gR6S8woF5R
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