कल्याण बनर्जी का विवादित सफर: बोतल फेंकने से लेकर निलंबन तक, क्यों सुर्खियों में रहते हैं TMC के फायरब्रांड सांसद?
News Image

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गए हैं। लोकसभा में महिला सांसदों के प्रति कथित रूप से असंसदीय और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में उन्हें पूरे मॉनसून सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई सदन में एनसीपीआई (NCPI) में शामिल हो चुके पूर्व TMC सांसदों के साथ हुई तीखी बहस के बाद की गई।

सदन में क्या हुआ?

सदन की कार्यवाही के दौरान TMC से अलग हुए सांसदों के साथ कल्याण बनर्जी की जोरदार बहस हुई। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने महिला सांसदों (मिताली बाग, शताब्दी रॉय और काकोली घोष दस्तीदार) के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। शिकायत मिलने के बाद पीठासीन अधिकारी कृष्ण प्रसाद तेनेटी ने इसे सदन की गरिमा के खिलाफ माना। इसके बाद केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा पेश किए गए निलंबन प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

मैं गद्दारों से नहीं डरता : कल्याण बनर्जी

निलंबन के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कल्याण बनर्जी ने बागी सांसदों पर फिर हमला बोला। उन्होंने कहा, मुझे सस्पेंड करने से उन्हें क्या मिलेगा? यह मुश्किल से 20 लोगों की पार्टी है। ये सभी गद्दार और बेईमान लोग हैं। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की जनता उन्हें कभी स्वीकार नहीं करेगी।

विवादों से पुराना नाता

कल्याण बनर्जी का राजनीतिक करियर विवादों का दूसरा नाम रहा है:

अपनी ही पार्टी के लिए सिरदर्द?

केवल विपक्ष ही नहीं, कल्याण बनर्जी पिछले कुछ समय से पार्टी नेतृत्व के भी निशाने पर रहे हैं। 21 जुलाई की रैली में नाम न होने पर नाराजगी जताना हो या अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर सवाल उठाना, वे अपनी ही पार्टी की रणनीतियों की खुलकर आलोचना करते रहे हैं। हालांकि, कानूनी मामलों में उनकी विशेषज्ञता के कारण पार्टी उन्हें पूरी तरह दरकिनार करने से बचती रही है।

कौन हैं कल्याण बनर्जी?

वकालत से राजनीति में आए कल्याण बनर्जी ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद कानूनी सलाहकारों में गिने जाते हैं। 2001 में विधायक और 2009 में पहली बार सांसद बने बनर्जी की पहचान एक आक्रामक वक्ता की है। हालांकि, उनके बयान अक्सर धार्मिक भावनाओं और संसदीय मर्यादाओं को लेकर विवादों को जन्म देते रहे हैं।

यह निलंबन ऐसे समय में हुआ है जब टीएमसी पहले से ही आंतरिक कलह और पश्चिम बंगाल में चुनावी चुनौतियों से जूझ रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी उन पर क्या रुख अपनाती है।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

कीचड़ में नंगे पैर विराट-अनुष्का का आश्रम प्रेम, लेकिन छात्रों के मुद्दे पर क्यों खामोश किंग कोहली ?

Story 1

भारत बनाम जिम्बाब्वे: हरारे में टी20 सीरीज का बिगुल, जानें मैच का समय, पिच और लाइव स्ट्रीमिंग की पूरी जानकारी

Story 1

इटारसी में मौत का लाइव वीडियो: रुकी हुई ट्रेन की छत पर चढ़ा युवक, हाई वोल्टेज करंट से हुआ जोरदार धमाका

Story 1

गंभीर की अनदेखी, कुलदीप का बड़ा दांव; अब इंग्लिश काउंटी में दिखाएंगे अपना जलवा

Story 1

सोने से भी महंगे हुए ये बंदर: चीन की लैब में आखिर क्यों मचा है मकॉक के लिए हाहाकार?

Story 1

IND vs ZIM T20: जिम्बाब्वे में मिशन फतह के लिए तैयार टीम इंडिया, जानिए कब और कहां देखें फ्री में लाइव मैच

Story 1

वैभव सूर्यवंशी के पास इतिहास रचने का मौका: जिम्बाब्वे में 150 छक्कों का वर्ल्ड रिकॉर्ड टूटना तय?

Story 1

ट्रैफिक सिग्नल पर लैपटॉप खोलकर काम करने लगा शख्स, वीडियो देख लोगों ने कहा- इंसान अब मशीन बन गया है

Story 1

चेन्नई ग्रैंड मास्टर्स 2026: अजेय रहकर अलिरेजा फिरोजा ने जीता खिताब, वर्ल्ड चैंपियन डी गुकेश की शर्मनाक विदाई

Story 1

86 में से 56 SDM एक ही जाति के: योगी ने खोली अखिलेश के दौर की भर्ती कुंडली