वैभव सूर्यवंशी के पास इतिहास रचने का मौका: जिम्बाब्वे में 150 छक्कों का वर्ल्ड रिकॉर्ड टूटना तय?
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भारतीय क्रिकेट के भविष्य माने जा रहे युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी पर इन दिनों दबाव और उम्मीदों का दोहरा बोझ है। इंग्लैंड दौरे पर निराशाजनक प्रदर्शन के बाद, अब जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी-20 सीरीज उनके करियर के लिए करो या मरो की स्थिति बन गई है।

इतिहास रचने के दहलीज पर वैभव संजू सैमसन की अनुपस्थिति में, वैभव सूर्यवंशी को तीनों मैचों में मौका मिलना तय माना जा रहा है। अगर वह अपनी लय हासिल कर लेते हैं, तो उनके नाम एक बड़ा वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज हो सकता है। वैभव ने अभी तक अपने 37 टी-20 मैचों में 139 छक्के जड़े हैं।

यदि वह जिम्बाब्वे के खिलाफ आगामी सीरीज में 11 छक्के और जड़ देते हैं, तो वह टी-20 क्रिकेट में 150 छक्कों के आंकड़े तक पहुंच जाएंगे। सबसे कम पारियों में 150 छक्के मारने का यह कारनामा वह सिर्फ 40 मैचों में पूरा कर लेंगे।

मोहम्मद वसीम का रिकॉर्ड खतरे में वर्तमान में यह रिकॉर्ड यूएई के बल्लेबाज मोहम्मद वसीम के नाम है, जिन्होंने 66 पारियों में 150 छक्के पूरे किए थे। वैभव के पास इस रिकॉर्ड को ध्वस्त करके दुनिया का सबसे तेज 150 छक्के लगाने वाला बल्लेबाज बनने का स्वर्णिम अवसर है। इस सूची में वेस्टइंडीज के इविन लुईस और दिग्गज क्रिस गेल भी शामिल हैं।

खास मैदान से वैभव का पुराना नाता जिम्बाब्वे का हरारे मैदान वैभव के लिए लकी साबित हो सकता है। इसी मैदान पर चार महीने पहले उन्होंने अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में 175 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली थी। वैभव ने स्वयं स्वीकार किया कि इस मैदान पर वापसी करना उनके लिए बेहद खास है और वह उसी सकारात्मक ऊर्जा के साथ मैदान में उतरेंगे।

करियर को नई उड़ान या टीम से बाहर का रास्ता? वैभव के लिए यह सीरीज केवल रिकॉर्ड बनाने का मंच नहीं है, बल्कि अपनी साख बचाने की चुनौती भी है। इंग्लैंड से लौटने के बाद उन्होंने अपनी तकनीक पर काफी काम किया है। यदि वह इस सीरीज में बल्ले से जलवा दिखाते हैं, तो एशियन गेम्स के लिए उनका दावा और मजबूत हो जाएगा। वहीं, एक और विफलता उन्हें भारतीय टीम से बाहर का रास्ता भी दिखा सकती है। फैंस को अब उनके बल्ले से उस तूफानी पारी का इंतजार है, जिसने उन्हें रातों-रात स्टार बनाया था।

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