सोने से भी महंगे हुए ये बंदर: चीन की लैब में आखिर क्यों मचा है मकॉक के लिए हाहाकार?
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चीन की प्रयोगशालाओं में इन दिनों एक ऐसे जीव की तलाश है, जिसकी कीमत सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। यह कोई कीमती धातु या दुर्लभ रत्न नहीं, बल्कि मकॉक (Macaque) प्रजाति का एक बंदर है। चीन में एक मकॉक बंदर की कीमत 25 लाख रुपये के पार पहुंच गई है, जो इसे दुनिया के सबसे महंगे जानवरों की श्रेणी में खड़ा करता है।

कीमत में बेतहाशा उछाल: 7 हजार से 2 लाख तक का सफर हैरानी की बात यह है कि साल 2014 में जिस बंदर की कीमत महज 7,000 चीनी युआन हुआ करती थी, आज उसकी कीमत 2,00,000 युआन तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा चीन की औसत वार्षिक आय से भी कहीं ज्यादा है। वैज्ञानिकों के लिए समस्या सिर्फ कीमत नहीं, बल्कि बंदरों की अनुपलब्धता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि भारी रकम देने के बाद भी लैब को बंदर नहीं मिल रहे हैं, जिससे महत्वपूर्ण मेडिकल रिसर्च अधर में लटक गई हैं।

चीन का मेगा-गोल्ड: बायोटेक हब बनने की दौड़ चीन के इस संकट के पीछे उसका वैश्विक महाशक्ति बनने का सपना है। शी जिनपिंग सरकार फार्मा और बायोटेक क्षेत्र में पश्चिम के एकाधिकार को चुनौती देना चाहती है। कैंसर, डायबिटीज, अल्जाइमर और अन्य ऑटोइम्यून बीमारियों के लिए दवा खोजने की होड़ में अरबों डॉलर का निवेश किया गया है। लेकिन किसी भी नई दवा को इंसानों पर आजमाने से पहले जानवरों पर टेस्ट करना अनिवार्य है।

इंसानों के जेनेटिक जुड़वां हैं मकॉक शोध के लिए मकॉक बंदर ही पहली पसंद क्यों हैं? इसका जवाब उनके DNA में छिपा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, मकॉक बंदरों का जैविक मेकअप और रिएक्शन इंसानों से बहुत अधिक मेल खाते हैं। यही कारण है कि नई जीवन रक्षक दवाओं और वैक्सीन्स के सफल परीक्षण के लिए ये बंदर अनिवार्य हो गए हैं। इनके बिना शोध की प्रक्रिया लगभग असंभव हो जाती है।

सप्लाई संकट: मांग ज्यादा, उपलब्धता कम इस संकट के पीछे एक और बड़ी वजह जंगलों में इनकी घटती संख्या है। बेतहाशा मांग के कारण इनका शिकार बढ़ा, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बंदरों के व्यापार और पकड़ने पर कड़े नियम लागू कर दिए गए। कोरोना महामारी ने इस सप्लाई चेन को और भी ज्यादा बाधित कर दिया है। जानकारों का अनुमान है कि 2025 से 2027 के बीच चीन की लैब्स को हर साल 50 हजार से भी कम बंदर मिल पाएंगे, जबकि मांग इससे कहीं अधिक रहने वाली है।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. मकॉक (Macaque) क्या है? A. यह बंदरों की एक विशेष प्रजाति है, जिसका उपयोग उनके मानवीय DNA के करीब होने के कारण मेडिकल रिसर्च और लैब ट्रायल्स में किया जाता है।

Q. कीमत 25 लाख रुपये तक कैसे पहुंची? A. चीन की बायोटेक इंडस्ट्री का तेजी से विस्तार और इनकी भारी किल्लत (मांग-आपूर्ति का असंतुलन) ने इनकी कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है।

Q. दवाओं के ट्रायल के लिए यही क्यों चुने जाते हैं? A. इनका DNA और जैविक प्रतिक्रियाएं इंसानों से 90% से ज्यादा मेल खाती हैं, जिससे दवा का सटीक असर पता चल पाता है।

Q. रिसर्च पर क्या असर पड़ रहा है? A. बंदरों की कमी के कारण शोधकर्ताओं को कई जीवन रक्षक दवाओं के परीक्षण और महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अध्ययन बीच में ही रोकने पड़ रहे हैं।

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