अस्पताल से सोनम वांगचुक का बड़ा ऐलान: शर्तें पूरी हों, तो अनशन खत्म करने को तैयार
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नई दिल्ली: शिक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों के हक की लड़ाई लड़ रहे प्रख्यात शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने अस्पताल से सरकार को एक भावुक और निर्णायक पत्र लिखा है। वांगचुक ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से लेती है, तो वह अपना अनशन समाप्त करने के लिए तैयार हैं।

मंत्रियों से हुई मुलाकात, मिली सकारात्मक उम्मीद वांगचुक ने बताया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने बीती रात अस्पताल में उनसे मुलाकात की। उन्होंने दोनों नेताओं का आभार जताते हुए कहा कि चर्चा के दौरान उन्हें आश्वासन मिला है कि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाएगी।

वांगचुक की प्रमुख शर्तें सोनम वांगचुक ने अपनी चिट्ठी में सरकार के सामने तीन मुख्य शर्तें रखी हैं:

  1. पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए।
  2. संसद में शिक्षा प्रणाली की विफलता पर सार्थक बहस हो।
  3. शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर गंभीरता से विचार किया जाए।

मैं जीना चाहता हूं, छात्रों के बीच लौटना चाहता हूं वांगचुक ने अपनी मन की बात साझा करते हुए लिखा, मैं जीना चाहता हूं और अपने छात्रों व शिक्षा के उस काम की ओर वापस लौटना चाहता हूं जिसने मेरे जीवन को अर्थ दिया है। लेकिन मैं उन युवाओं की कीमत पर ऐसा नहीं कर सकता, जिनके भविष्य के लिए यह आंदोलन शुरू हुआ था।

65 सांसदों की अपील का सम्मान वांगचुक ने आगे बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इन सांसदों ने उन्हें याद दिलाया है कि देश की सेवा में उन्हें अभी और भी बहुत काम करना बाकी है। वह उनके सुझावों का सम्मान करते हैं।

युवा प्रदर्शनकारियों के लिए सुरक्षा की मांग अपने पत्र में वांगचुक ने सरकार से यह वादा भी मांगा है कि आंदोलन में शामिल किसी भी युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई या उत्पीड़न नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, उनका एकमात्र गुनाह यह है कि उन्होंने एक जवाबदेह शिक्षा प्रणाली के लिए अपनी आवाज उठाई है।

लोकतांत्रिक आंदोलन बनाम पुलिस कार्रवाई 20 जुलाई को हुए चलो संसद मार्च का जिक्र करते हुए वांगचुक ने कहा कि पुलिस की ज्यादतियों और बल प्रयोग के बावजूद यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार बदले की भावना से कोई कार्रवाई नहीं करेगी, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं में युवाओं का भरोसा बना रहे।

वांगचुक ने अपनी चिट्ठी के अंत में कहा कि यदि सरकार उनकी शर्तों पर भरोसा दिलाती है, तो वे लाखों युवा भारतीयों की आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए अपना अनशन समाप्त कर देंगे। अब गेंद सरकार के पाले में है।

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