जंतर-मंतर बवाल: सादी वर्दी वाली पुलिस और जनता का आमना-सामना, क्या यह कानूनन अपराध है?
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान सोमवार को एक गंभीर स्थिति पैदा हो गई। प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर लाठियां बरसाने के वीडियो वायरल हुए। इस दौरान कई पुलिसकर्मी भीड़ के गुस्से का शिकार भी हुए।

सादे कपड़ों में पुलिस का ऑपरेशन और सवाल जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारी यह देख हैरान रह गए कि लाठियां भांजने वाले लोग वर्दी में नहीं थे। हालांकि, जैसे ही भीड़ ने उन पर पलटवार किया और पुलिसकर्मियों ने अपना आई-कार्ड दिखाया, प्रदर्शनकारियों ने उन्हें छोड़ दिया। यह घटना अब एक बड़ा कानूनी सवाल खड़ा कर रही है: क्या सादी वर्दी वाले पुलिसकर्मी पर हमला सरकारी काम में बाधा है या आत्मरक्षा ?

पूर्व CP ने क्या कहा? दिल्ली पुलिस के एक पूर्व कमिश्नर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि खुफिया जानकारी जुटाने के लिए पुलिस का सादे कपड़ों में रहना सामान्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सादे कपड़ों में तैनात कर्मियों को लाठी चलाने का कोई हक नहीं है। प्रदर्शन स्थलों पर स्थिति संभालना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन कानून के दायरे में रहकर ही बल प्रयोग होना चाहिए।

क्या है आत्मरक्षा का कानूनी अधिकार? कानूनी जानकारों के अनुसार, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पुरानी IPC की धारा 99 नागरिकों को प्राइवेट डिफेंस यानी आत्मरक्षा का अधिकार देती है। अगर किसी व्यक्ति को यह पता ही न हो कि सामने वाला पुलिसकर्मी है और वह उस पर हमला कर रहा है, तो पीड़ित व्यक्ति को अपनी जान बचाने के लिए जवाबी कार्रवाई करने का पूरा कानूनी अधिकार है।

अदालत में कैसे काम आएगा यह बचाव? पटियाला हाउस कोर्ट के वकील राहुल सिंह का कहना है कि अदालत क्रिमिनल इंटेंट (आपराधिक नीयत) देखती है। इस मामले में भीड़ का यह बर्ताव कि आई-कार्ड देखते ही उन्होंने मारपीट रोक दी, यह साबित करता है कि उनका इरादा पुलिस पर हमला करना नहीं, बल्कि खुद को अज्ञात हमलावरों से बचाना था। अदालत में यह सबूत प्रदर्शनकारियों के लिए सबसे बड़ा बचाव बनेगा।

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का उल्लंघन? सुप्रीम कोर्ट और मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान पुलिस अधिकारियों की स्पष्ट पहचान होनी चाहिए। सादे कपड़ों में ऑपरेशन के दौरान बल प्रयोग से पहले अपनी आधिकारिक पहचान जाहिर करना अनिवार्य है।

निष्कर्ष पुलिस इस मामले में सरकारी काम में बाधा डालने सहित अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर सकती है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पुलिस ने बिना पहचान उजागर किए बल प्रयोग किया, तो कोर्ट में नागरिकों को गुड फेथ और प्राइवेट डिफेंस का लाभ मिलना तय है। अब गेंद दिल्ली पुलिस के पाले में है कि वह इस प्लेन क्लोज फॉर्मूले पर क्या सफाई देती है।

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