सोनम वांगचुक का बड़ा ऐलान: अनशन जारी रहेगा जब तक युवाओं को नहीं मिलेगी न्याय की राह
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नई दिल्ली: प्रसिद्ध एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने अपने अनशन को लेकर एक नई और सख्त शर्त रख दी है। लद्दाख और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे इस विरोध प्रदर्शन के बीच, वांगचुक ने साफ कर दिया है कि उनका उपवास तब तक नहीं टूटेगा जब तक प्रदर्शनकारी युवाओं की बात सुनी नहीं जाती।

अनशन जारी रखने की शर्त वांगचुक ने सोशल मीडिया पर अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा, शांतिपूर्ण विरोध कर रहे युवाओं के साथ जिस तरह की बर्बरता हुई है, उसे देखते हुए मैंने अनशन जारी रखने का फैसला किया है। मेरी मांग है कि युवा नेताओं को संसद भवन में सांसदों से मिलने की अनुमति दी जाए, या फिर मुझे अस्पताल में उन युवाओं से मिलने दिया जाए।

सरकार से समाधान की अपील एक्टिविस्ट ने सरकार और पुलिस बल से अपील की है कि वे इस मुद्दे को और न उलझाएं। उन्होंने कहा, सरकार और पुलिस कल छात्रों को संसद के सामने अपनी शिकायतें रखने की अनुमति देकर इस गतिरोध को खत्म करे। मुझे विश्वास है कि हमारे युवा प्रदर्शनकारी पूरी शांति और धैर्य के साथ अपना पक्ष रखेंगे। साथ ही, उन्होंने शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करने की मांग भी की है।

25 लाख युवाओं का हुजूम बना सरकार के लिए चेतावनी सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन स्थल के 5 किलोमीटर के दायरे में 25 लाख से ज्यादा युवा मौजूद हैं।

डॉ. आंग्मो ने कहा, सरकार और पुलिस झूठ का सहारा ले रही है और लाठीचार्ज कर अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल कर रही है। मेट्रो और अन्य सेवाओं को बंद करना सरकार की घबराहट को दर्शाता है। यह सरकार के लिए एक चेतावनी है कि अब जोर-जबरदस्ती से काम नहीं चलेगा।

सियासी गलियारों में हड़कंप इस पूरे प्रकरण ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इस मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और प्रदर्शनकारी नेताओं की मुलाकात पर सवाल खड़े करते हुए कहा, किस हैसियत से वे मिल रहे हैं? शिक्षा मंत्री को अब तक इस्तीफा दे देना चाहिए था।

वहीं, दूसरी ओर CJP (सीजेपी) ने दावा किया है कि केंद्रीय मंत्री नड्डा ने प्रदर्शनकारियों की तीन प्रमुख मांगों पर विचार करने के लिए समय मांगा है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इस मुद्दे का कोई सकारात्मक समाधान निकाल पाती है या वांगचुक का अनशन और लंबा खिंचेगा।

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