152 पेपर लीक, 0 सजा: परीक्षाओं की साख पर मंडराता सबसे बड़ा खतरा
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देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। हाल ही में सामने आए एक चौंकाने वाले आंकड़े ने शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। 2014 से अब तक देशभर में कम से कम 152 बार पेपर लीक होने की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिसने लाखों युवाओं के भविष्य को अधर में लटका दिया है।

दिल्ली और केंद्रीय संस्थानों से बढ़ा खतरा

डेटा के मुताबिक, सबसे अधिक 38 पेपर लीक के मामले दिल्ली और केंद्र सरकार की एजेंसियों से जुड़ी परीक्षाओं में सामने आए हैं। इनमें नीट (NEET), जेईई मेन (JEE Main), यूजीसी नेट (UGC NET), एसएससी (SSC), रेलवे और सीयूईटी (CUET) जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाएं शामिल हैं। यह दर्शाता है कि केवल राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की भर्ती एजेंसियां भी पेपर सुरक्षित रखने में नाकाम रही हैं।

राजस्थान और गुजरात: विवादों के केंद्र

राजस्थान और गुजरात में भी स्थिति चिंताजनक है, जहाँ 11-11 पेपर लीक के मामले दर्ज किए गए हैं। राजस्थान में रीट (REET), आरपीएससी और पटवारी जैसी परीक्षाओं में धांधली हुई, तो गुजरात में तलाटी, पंचायत क्लर्क और वन रक्षक की भर्ती परीक्षाएं विवादों में रहीं। बार-बार पेपर रद्द होने से इन राज्यों के अभ्यर्थियों को मानसिक और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा है।

यूपी, बिहार और एमपी का बुरा हाल

उत्तर प्रदेश में 10, बिहार में 8 और मध्य प्रदेश में 8 प्रमुख पेपर लीक की घटनाएं दर्ज की गई हैं। उत्तर प्रदेश में सिपाही भर्ती और आरओ-एआरओ जैसे बड़े एग्जाम प्रभावित हुए, वहीं बिहार में बीपीएससी और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठे। मध्य प्रदेश में भी पटवारी और बोर्ड परीक्षाएं लीक होने से लाखों छात्रों की मेहनत पर पानी फिर गया।

देश भर में फैला नेटवर्क

यह समस्या किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा और महाराष्ट्र में 6-6, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल में 5-5, तथा उत्तराखंड, हिमाचल और तेलंगाना में 4-4 मामले सामने आए हैं। पंजाब से लेकर मणिपुर तक, देश का शायद ही कोई राज्य बचा हो जहाँ परीक्षाओं में सेंधमारी न हुई हो।

स्कूल से लेकर कॉलेज तक सब दांव पर

पेपर लीक का यह मकड़जाल केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं है। मेडिकल (NEET), इंजीनियरिंग (JEE), उच्च शिक्षा (UGC NET) और बोर्ड परीक्षाओं तक, हर स्तर पर गोपनीयता भंग हुई है। परीक्षाओं में हो रही यह धांधली न केवल छात्रों का मनोबल तोड़ रही है, बल्कि देश की शैक्षणिक साख को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर कर रही है।

लगातार 152 घटनाओं के बावजूद, दोषियों को सजा मिलने की धीमी रफ्तार इस पूरे तंत्र पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही है।

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