होर्मुज जलडमरूमध्य पर मंडराया संकट: पनामा की चेतावनी, वैश्विक व्यापार के लिए बड़ा खतरा
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वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर संकट के बादल पनामा के विदेश मंत्री जेवियर एडुआर्डो मार्टिनेज-अचा वास्केज ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा करार दिया है। पनामा का मानना है कि यदि इस प्रमुख समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह की बाधा आती है, तो इसका सीधा असर तेल की कीमतों और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ेगा।

भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर पनामा की नजर वास्केज ने भारतीय अधिकारियों के साथ चर्चा के दौरान होर्मुज में तैनात भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में भारतीय सीफेयरर्स इस संवेदनशील क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों पर हैं। पनामा इस स्थिति को केवल एक आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक मानवीय और वैश्विक सुरक्षा का विषय मानता है।

समुद्री कानून ही एकमात्र समाधान दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग रजिस्ट्रियों में से एक होने के नाते, पनामा ने सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का सख्ती से पालन करने की अपील की है। विदेश मंत्री ने दोहराया कि समुद्री मार्गों को किसी भी परिस्थिति में बाधित नहीं किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि नौवहन की स्वतंत्रता ही वैश्विक सप्लाई चेन की जान है।

पनामा नहर और भारत की भूमिका अपनी भारत यात्रा के दौरान, वास्केज ने पनामा नहर की तटस्थता से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते में भारत की सक्रिय भागीदारी की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ इस मुद्दे पर सकारात्मक बातचीत हुई है। पनामा चाहता है कि भारत इस महत्वपूर्ण वैश्विक व्यवस्था का हिस्सा बने।

सैन्य टकराव नहीं, कूटनीति का रास्ता पनामा का स्पष्ट रुख है कि समुद्री विवादों का समाधान सैन्य टकराव से नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति से होना चाहिए। वास्केज ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के साथ मिलकर वे दुनिया भर के नाविकों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं।

शांति के लिए भारत के रुख का समर्थन मध्य पूर्व के तनाव पर पनामा ने पूरी तरह भारत के शांतिपूर्ण दृष्टिकोण का समर्थन किया है। वास्केज ने जोर देकर कहा कि संयम और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन ही इस संकट का एकमात्र समाधान है। होर्मुज का रास्ता हर देश के लिए खुला रहना चाहिए, क्योंकि यही विश्व अर्थव्यवस्था की स्थिरता की सबसे बड़ी गारंटी है।

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