जंतर-मंतर पर तनाव: शांतिपूर्ण प्रदर्शन ने लिया हिंसक रूप देश में पेपर लीक और लचर शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ पिछले एक महीने से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के समर्थकों पर आज भारी पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया। चलो संसद मार्च के दौरान पुलिस और आरएएफ (RAF) ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिससे इलाके में अफरातफरी मच गई।
संसद कूच की तैयारी और पुलिस की घेराबंदी प्रदर्शनकारी छात्र सुबह 9 बजे जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च करने वाले थे। सुरक्षा के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने 25 कंपनियों की तैनाती की थी और भारी बैरिकेडिंग की थी। छात्रों का मुख्य उद्देश्य शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा था। जैसे ही प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ने की कोशिश में बैरिकेड्स तक पहुंचे, स्थिति तनावपूर्ण हो गई और सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग शुरू कर दिया।
घायल हुए छात्र और पुलिसकर्मी इस हिंसक झड़प में कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनके सिर फूटने और कपड़े फटने की तस्वीरें सामने आई हैं। दूसरी ओर, पुलिस का दावा है कि झड़प में 50 से अधिक सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए हैं। अब तक करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस का यह भी आरोप है कि भीड़ में मौजूद सभी लोग छात्र नहीं थे और किसी बड़ी साजिश की आशंका के चलते जांच की जा रही है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठते तीखे सवाल घटना के बाद सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि जो प्रदर्शन एक महीने से शांतिपूर्ण था, उसे अचानक उग्र कैसे घोषित किया गया? सवाल यह भी है कि क्या पुलिस स्थिति संभालने में नाकाम रही या जानबूझकर हालात बिगड़ने दिए गए। कुछ समय पहले सोनम वांगचुक को शांतिपूर्वक हटाने वाली पुलिस ने इस बार इतना सख्त रवैया क्यों अपनाया, यह एक बड़ा पहेली बना हुआ है।
साजिश और पाकिस्तान एंगल की जांच पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रदर्शन को लेकर एक अलग एंगल से भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का दावा है कि पाकिस्तान से संचालित कुछ सोशल मीडिया हैंडल भ्रामक जानकारी फैलाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे। इसके अलावा, जनपथ मेट्रो स्टेशन के पास एक पीसीआर वाहन में तोड़फोड़ की घटनाओं की भी जांच जारी है।
दिल्ली हाईकोर्ट में निजता का मुद्दा इसी बीच, जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की निरंतर वीडियोग्राफी को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने इसे निजता के अधिकार का उल्लंघन बताया, जबकि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी बताया। अदालत ने पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा है कि क्या विरोध प्रदर्शनों के संचालन के लिए कोई ठोस निर्देश मौजूद हैं।
राजनीतिक घमासान जारी इस घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया है, जबकि केंद्र सरकार ने संसद क्षेत्र की सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बताया है। फिलहाल, जंतर-मंतर की यह घटना एक बड़ा प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी सवाल बनकर खड़ी हो गई है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज की नौबत क्यों आई ?
— Times Now Navbharat (@TNNavbharat) July 20, 2026
देखिए, चक्रView सुमित अवस्थी के साथ#ChakraView #ChakraViewWithSumitAwasthi @Awasthis #SonamWangchuk #JantarMantar #Protest #CJPProtest pic.twitter.com/0Yz7zsXAYE
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