दिल्ली में बवाल: पाकिस्तान की डिजिटल साजिश का भारतीय सेना ने एक मिनट में किया पर्दाफाश
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के मार्च और हंगामे के बीच, सीमा पार से भारत के खिलाफ एक खतरनाक प्रोपेगैंडा फैलाया गया। पाकिस्तान से संचालित सोशल मीडिया हैंडल्स ने भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था और सुरक्षा एजेंसियों को बदनाम करने के लिए एक झूठी टूलकिट सक्रिय की।

क्या थी पाकिस्तान की घिनौनी साजिश? इस डिजिटल हमले का मुख्य मकसद दिल्ली में चल रहे नागरिक आंदोलन की आड़ में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाना था। पाकिस्तान समर्थित हैंडल से जानबूझकर भ्रामक विजुअल्स और पुरानी तस्वीरों को वायरल किया गया, ताकि देश के भीतर गृह-युद्ध जैसी स्थिति और दहशत फैलाई जा सके।

सेना पर लगाए गए संगीन और झूठे आरोप दुष्प्रचार फैलाने वालों ने दावा किया कि दिल्ली की सड़कों पर भारतीय सेना को उतार दिया गया है। इन पोस्ट्स में यह झूठ फैलाया गया कि संसद भवन के पास सेना प्रदर्शनकारियों पर बंदूकें तान रही है और इस दौरान कई लोगों की मौत हो चुकी है। प्रोपेगैंडा का स्तर इतना गिर गया था कि नागरिक विरोध के पुराने फुटेज को फर्जी सैन्य कार्रवाई बताकर पेश किया गया।

भारतीय सेना ने एक मिनट में निकाली हवा जैसे ही यह झूठ सोशल मीडिया पर फैला, भारतीय सेना के आधिकारिक फैक्ट-चेक विंग और दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस प्रोपेगैंडा का पर्दाफाश कर दिया। सेना ने साफ शब्दों में कहा कि दिल्ली में कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य है और सेना की कोई तैनाती नहीं की गई है।

पुलिस ने स्थिति को किया स्पष्ट अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि:

भारतीय एजेंसियों की इस तत्परता ने पाकिस्तान की इस सोची-समझी साजिश को नाकाम कर दिया और साबित कर दिया कि भारत के खिलाफ कोई भी डिजिटल हमला अब ज्यादा देर तक टिक नहीं सकता।

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