जंतर-मंतर स्याही कांड: कौन हैं बरखा त्रेहन, जिन्होंने अभिजीत दीपके पर किया हमला?
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर 18 जुलाई को चल रहे एक प्रदर्शन के दौरान उस समय हड़कंप मच गया, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके पर एक महिला ने स्याही फेंक दी। यह महिला कोई और नहीं, बल्कि जानी-मानी सोशल एक्टिविस्ट बरखा त्रेहन थीं। इस घटना के बाद वह सोशल मीडिया और मुख्यधारा की खबरों में चर्चा का केंद्र बन गई हैं।

कौन हैं बरखा त्रेहन? बरखा त्रेहन खुद को एक मेन्स राइट्स एक्टिविस्ट (पुरुष अधिकार कार्यकर्ता) के रूप में पेश करती हैं। वह पुरुष आयोग नामक संगठन की अध्यक्ष हैं। उनका संगठन जेंडर से जुड़े कानूनों में बदलाव और भारत में एक सरकारी पुरुष आयोग बनाने की मांग उठाता है। बरखा का तर्क है कि देश में दहेज और घरेलू हिंसा जैसे कानूनों का अक्सर पुरुषों के खिलाफ गलत इस्तेमाल किया जाता है।

विवादों से पुराना नाता यह पहली बार नहीं है जब बरखा त्रेहन का नाम किसी बड़े विवाद से जुड़ा हो। इससे पहले वे उन्नाव रेप केस के आरोपी और पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का सार्वजनिक रूप से समर्थन करने को लेकर कटघरे में आ चुकी हैं। दिसंबर 2025 में भी उन्होंने सेंगर के समर्थन में जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन का नेतृत्व किया था।

अभिजीत दीपके पर स्याही क्यों फेंकी? घटना के बाद बरखा त्रेहन ने खुद सामने आकर इस कदम की जिम्मेदारी ली। उन्होंने अपने बयान में कहा, मैंने अभिजीत दीपके पर स्याही इसलिए फेंकी क्योंकि उसने अपनी पार्टी के मंच से प्रभु श्रीराम और माता सीता का मजाक उड़ाया था, जिस पर वहां मौजूद लोग हंस रहे थे। मैं एक कट्टर हिंदू हूं और इस अपमान से मुझे गहरी ठेस पहुंची थी।

राजनीतिक एजेंडे का आरोप बरखा ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर चल रहा यह प्रदर्शन नीट (NEET) के मुद्दे से भटककर एक राजनीतिक एजेंडे में बदल गया है। उन्होंने लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को लेकर भी बड़ा दावा किया। बरखा का कहना है कि वे वहां वांगचुक को सचेत करने गई थीं कि कुछ लोग अन्ना हजारे के आंदोलन की तरह ही उनका भी इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर रहे हैं।

पुलिस हिरासत और मारपीट का दावा घटना के बाद प्रदर्शनकारियों ने बरखा को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। बरखा ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि स्याही फेंकने के बाद सीजेपी समर्थकों ने उनके साथ बदसलूकी की, उनके बाल खींचे और उन्हें पीटा। उन्होंने दिल्ली पुलिस का आभार जताते हुए कहा कि पुलिस ने समय रहते हस्तक्षेप कर उनकी जान बचाई। बरखा ने जोर देकर कहा कि उन्होंने कोई हिंसा नहीं की, बल्कि केवल स्याही के जरिए अपना शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया था।

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