ईरान ने मार गिराया अमेरिका का अदृश्य शिकारी, MQ-9 ड्रोन को बनाया निशाना!
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ईरान का बड़ा दावा ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने खुजेस्तान प्रांत के अहवाज में अमेरिका के सबसे घातक MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया है। ईरान का कहना है कि उन्होंने अपने नए एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल कर इस ड्रोन को इंटरसेप्ट किया और जमीन पर गिरा दिया।

वीडियो से मचा हड़कंप ईरानी सरकारी मीडिया ने इस घटना का एक कथित वीडियो भी जारी किया है, जिसमें ड्रोन को आसमान से गिरते हुए देखा जा सकता है। हालांकि, इस वीडियो की सत्यता की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। फिलहाल, अमेरिकी प्रशासन या पेंटागन ने इस दावे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

लगातार जारी है अमेरिका का पलटवार एक तरफ ईरान ड्रोन गिराने का दावा कर रहा है, तो दूसरी तरफ अमेरिकी सेना ने भी अपनी आक्रामक नीति जारी रखी है। पेंटागन के अनुसार, अमेरिकी बलों ने लगातार आठवीं रात ईरान के विभिन्न ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। जॉर्डन में ईरान समर्थित हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद से वाशिंगटन का रुख काफी सख्त हो गया है।

क्या है MQ-9 रीपर की ताकत? MQ-9 रीपर अमेरिका का एक बेहद आधुनिक और शक्तिशाली हंटर-किलर ड्रोन है। यह न केवल लंबी दूरी तक जासूसी करने में सक्षम है, बल्कि दुश्मन के ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमला करने के लिए भी जाना जाता है। इसे मार गिराना अमेरिका के लिए एक बड़ी सामरिक चुनौती और शर्मिंदगी का विषय हो सकता है, यदि यह दावा सही साबित होता है।

बढ़ते तनाव से बढ़ी वैश्विक चिंता ईरान और अमेरिका के बीच चल रही यह खींचतान पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। जॉर्डन हमले का बदला लेने के लिए अमेरिका पहले ही जवाबी कार्रवाई तेज कर चुका है, और अब नए घटनाक्रम ने आग में घी डालने का काम किया है। अगर इस ड्रोन हमले की पुष्टि होती है, तो मध्य-पूर्व में एक बड़े और सीधे सैन्य संघर्ष की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

भारत के निवेश पर खतरा? इस जारी सैन्य तनाव का असर सुदूर इलाकों तक महसूस किया जा रहा है। चाबहार पोर्ट जैसे सामरिक महत्व के प्रोजेक्ट्स के इर्द-गिर्द भी तनाव की खबरें आ रही हैं, जहां अमेरिका ने कथित तौर पर कंट्रोल टॉवर को निशाना बनाया है। यह घटना भारत के रणनीतिक निवेश के लिए भी नई मुश्किलें पैदा कर सकती है। वर्तमान में पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका के अगले कदम और आधिकारिक बयान पर टिकी हैं।

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