संसद का मानसून सत्र सोमवार (20 जुलाई) से शुरू हो रहा है, जो राजनीतिक गहमागहमी के बीच बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। एक तरफ सरकार अपने विधायी एजेंडे को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी में है, तो दूसरी तरफ विपक्ष ने तीखे तेवरों के साथ सरकार को घेरने की पूरी रणनीति बना ली है।
संसद में इस बार सरकार और विपक्ष के बीच जोरदार टकराव तय माना जा रहा है। सरकार का तर्क है कि वह नियमों के दायरे में रहकर सार्थक चर्चा के लिए तैयार है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि सरकार जनहित के गंभीर मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है। नीट (NEET-UG) परीक्षा में कथित अनियमितताएं, राम मंदिर दान विवाद, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी जैसे संवेदनशील विषय सत्र के पहले ही दिन से हंगामे का कारण बन सकते हैं।
आठवीं लोकसभा के इस आठवें सत्र में सरकार का मुख्य फोकस इन 7 प्रमुख विधेयकों को पारित कराने पर है:
इनके अलावा, विदेशी अंशदान नियमन (FCRA) और शिक्षा से जुड़े पुराने लंबित विधेयकों को भी सरकार कानून का रूप देने की कोशिश करेगी।
हालांकि ये विषय आधिकारिक कार्यसूची का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में महिला आरक्षण और परिसीमन की चर्चा जोरों पर है। यदि सरकार इस पर संविधान संशोधन विधेयक लाती है, तो उसे पारित कराने के लिए दोनों सदनों में विशेष बहुमत की आवश्यकता होगी। इसके लिए सरकार को न केवल अपने सहयोगियों का, बल्कि विपक्षी दलों के एक बड़े वर्ग का समर्थन भी जुटाना होगा।
हालिया दलबदल और राजनीतिक घटनाक्रमों ने सदन के भीतर शक्ति संतुलन को नया मोड़ दिया है। इस सत्र में लोकसभा अध्यक्ष द्वारा लिए जाने वाले फैसलों पर सबकी नजर है, क्योंकि सांसदों से जुड़े लंबित मामलों का निर्णय सदन के संख्या बल को प्रभावित कर सकता है। किसी भी विधेयक के मतदान की स्थिति में प्रत्येक दल का रुख निर्णायक साबित होगा।
अतीत में देखा गया है कि तीखी बहस और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित होती रही है। यदि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बनी, तो महत्वपूर्ण विधायी कार्य खटाई में पड़ सकते हैं। सरकार का प्रयास कामकाज निपटाने का होगा, जबकि विपक्ष इन मुद्दों पर चर्चा कराए बिना पीछे हटने को तैयार नहीं है।
कुल मिलाकर, यह मानसून सत्र न केवल नई नीतियों के भविष्य का निर्धारण करेगा, बल्कि आने वाले समय में देश की राजनीति की दिशा भी तय करेगा। यह सत्र केवल कानूनों की किताब का हिस्सा नहीं, बल्कि लोकतंत्र में जवाबदेही और बहस की परीक्षा भी है।
The five new bills that the government is likely to take up during the Eighth Session of Eighteenth Lok Sabha:
— ANI (@ANI) July 17, 2026
1. The Income-tax (Amendment) Bill, 2026. (To replace an Ordinance)
2. The Supreme Court (Number of Judges) Amendment Bill, 2026 (To replace an Ordinance)
3. The… pic.twitter.com/8zfyTdGGXR
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