भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में संसद मार्च महज एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि जनता का वह दबाव है जो व्यवस्था की नींव हिलाने की ताकत रखता है। जब दफ्तरों और अदालतों में सुनवाई नहीं होती, तो जनता सड़कों पर उतरती है। हाल ही में काकरोच जनता पार्टी (CJP) का संसद मार्च भी इसी कड़ी का हिस्सा था, जिसे पुलिस ने जंतर-मंतर पर ही रोक दिया। आइए जानते हैं कि क्या वाकई संसद तक पहुंचना ही जीत की गारंटी है?
CJP ने परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों पर संसद घेराव का आह्वान किया था। 20 जुलाई 2026 को प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पर रोकने के लिए पुलिस को बैरिकेड लगाने पड़े और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। सोनम वांगचुक जैसे आंदोलन के चेहरों को सुरक्षा घेरे में लिया गया। फिलहाल, यह मार्च संसद के गेट तक तो नहीं पहुंच सका, लेकिन इसने पेपर लीक जैसे मुद्दे को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया है।
संसद मार्चों के इतिहास में किसान आंदोलन (2020) स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। हालांकि किसान दिल्ली की सीमाओं पर ही रोके गए, लेकिन उनके संकल्प ने एक साल तक सत्ता को हिलाए रखा। अंततः, सरकार को तीन कृषि कानून वापस लेने पड़े। यह साबित करता है कि संसद की दहलीज तक पहुंचना जरूरी नहीं, संसद के भीतर बैठे जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाना असली जीत है।
इतिहास गवाह है कि कई आंदोलनों को केवल आंशिक जीत मिली, लेकिन उनका असर गहरा रहा:
संसद भवन हाई सिक्योरिटी जोन है। प्रशासन का तर्क होता है कि सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था सर्वोपरि है। इसलिए, पुलिस हमेशा मार्च को तय सीमा (जंतर-मंतर) तक ही सीमित रखने की कोशिश करती है। लेकिन लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि जब सड़क की आवाज बुलंद होती है, तो बैरिकेड्स के पार भी संसद में बहस छिड़ जाती है।
अतीत के आंदोलनों पर नजर डालें तो स्पष्ट होता है कि सिर्फ संसद का दरवाजा छू लेने से समाधान नहीं निकलता। जीत तब मिलती है जब:
सीजेपी का मार्च अभी एक पड़ाव पर है। इसका परिणाम इस पर निर्भर करेगा कि सरकार उनकी मांगों पर कितना संवाद करती है और संसद के आगामी सत्रों में ये मुद्दे कितनी मजबूती से गूंजते हैं। सड़क की आवाज तभी असरदार होती है, जब वह शोर के बजाय एक संगठित और तार्किक दबाव बन जाए।
Protestors reached the main gate of parliament.
— Loveena🕉️ (@loveena_joshi06) July 20, 2026
Police fires tear gas. pic.twitter.com/N47ixHswEm
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