शिवसेना के 6 बागी सांसदों का शिंदे गुट में विलय: क्या यह स्पीकर का फैसला या भाजपा-संघ की सोची-समझी चाल?
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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार शाम शिवसेना (यूबीटी) के छह बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में विलय को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद लोकसभा में शिंदे गुट के सांसदों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। यह घटनाक्रम आगामी 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले हुआ है।

एक महीने बाद आई मंजूरी यह विलय विवाद करीब एक महीने पहले 22 जून को शुरू हुआ था। उस दौरान शिवसेना (यूबीटी) के बागी सांसद संजय हरिभाऊ जाधव, भाऊसाहेब वाकचौर, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश निंबालकर, संजय देशमुख और नागेश आष्टिकर ने शिंदे गुट का दामन थामा था। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इन सांसदों का स्वागत करते हुए इसे बालासाहेब ठाकरे की असली शिवसेना में वापसी बताया था।

उदित राज का तीखा हमला कांग्रेस नेता उदित राज ने इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह लोकसभा स्पीकर का स्वतंत्र निर्णय नहीं है, बल्कि भाजपा और आरएसएस की एक सोची-समझी साजिश है। उदित राज ने कहा, स्पीकर अब निष्पक्ष नहीं रहे, वे केवल एक मोहरे की तरह काम कर रहे हैं जिन्हें ऊपर से निर्देश मिलते हैं।

लोकतंत्र के लिए घातक है यह व्यवस्था उदित राज ने आगे कहा कि देश की संवैधानिक संस्थाओं में अब निष्पक्षता खत्म हो चुकी है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे इस स्थिति को लेकर जागृत हों। उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसियों का दबाव और प्रलोभन का इस्तेमाल करके विपक्षी दलों को तोड़ा जा रहा है, जो देश के लोकतंत्र के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

टीएमसी के बागियों को भी मिली राहत लोकसभा स्पीकर ने सिर्फ शिवसेना के बागियों को ही नहीं, बल्कि टीएमसी के बागी सांसदों को भी सदन में अलग बैठने की अनुमति दे दी है। टीएमसी के 20 सांसद एनसीपीआई (NCPI) में शामिल हो गए हैं और उन्होंने स्पीकर के समक्ष अपनी अलग पहचान और बैठने की व्यवस्था को लेकर मांग रखी थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया है।

बढ़ता संख्या बल और राजनीतिक समीकरण मानसून सत्र से ठीक पहले भाजपा और उसके सहयोगी गुटों द्वारा अपनी संख्या बल में इजाफा करने की कोशिशों को विपक्षी दल सत्ता का दुरुपयोग बता रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संसद के आगामी सत्र में इन फैसलों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

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