नोएडा अग्निकांड: जान पर खेलकर मजदूरों ने बचाईं 50 से ज्यादा जानें, मसीहा बने ये देवदूत
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नोएडा के सेक्टर-66 स्थित ममूरा इलाके में बुधवार सुबह एक चार मंजिला इमारत में लगी भीषण आग ने दो लोगों की जान ले ली। सुबह करीब 11 बजे हुए इस हादसे में 50 से अधिक लोगों की जान बाल-बाल बची। इस राहत कार्य में प्रशासन से पहले स्थानीय मजदूरों ने मोर्चा संभाला और रस्सियों व सीढ़ियों के सहारे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।

बैटरी चार्जिंग से हुआ धमाका शुरुआती जांच में सामने आया है कि आग इमारत के बेसमेंट में खड़ी एक इलेक्ट्रिक स्कूटी चार्जिंग के दौरान हुए विस्फोट से लगी। धमाका इतना जोरदार था कि बेसमेंट में खड़ी करीब 30-40 बाइकें आग की चपेट में आ गईं। देखते ही देखते आग और धुएं का गुबार पूरी इमारत में फैल गया, जिससे ऊपरी मंजिलों पर रह रहे लोग फंस गए।

मजदूर बने देवदूत जब बिल्डिंग के भीतर चीख-पुकार मची, तो सामने वाली छत पर काम कर रहे मजदूरों ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया। आसमा, गौरी और रवि शाक्य जैसे मजदूरों ने अपनी जान की परवाह किए बिना सीढ़ी और रस्सियों का जाल बिछाया।

आसमा ने बताया, जैसे ही आग लगी, हम मदद के लिए चिल्लाए। जब प्रशासन के पहुंचने में देरी हुई, तो हमने सीढ़ियों और रस्सियों के जरिए फंसे हुए बच्चों और बुजुर्गों समेत करीब 50-60 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। रवि शाक्य ने बताया कि वहां अफरा-तफरी का माहौल था और वे बस लोगों को बचाने में जुटे थे।

दो लोगों की मौत, प्रशासन पर उठे सवाल इस हादसे में बिहार की रहने वाली 22 वर्षीय स्नेहा श्रीवास्तव और एक अज्ञात युवक (लगभग 30 वर्ष) की मौत हो गई। मृतकों में से एक 80 फीसदी तक झुलस गया था। स्थानीय लोगों ने अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

अब्दुल नाम के स्थानीय निवासी ने पूछा कि पतली गलियों में इतनी ऊंची इमारतों का नक्शा कैसे पास हो जाता है? उन्होंने कहा कि यदि दमकल की गाड़ियां समय पर पहुंच पातीं, तो शायद जान बचाई जा सकती थी। फिलहाल, पुलिस प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन इस अग्निकांड ने एक बार फिर रिहायशी इलाकों में सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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