कुडनकुलम परमाणु संयंत्र का डेटा लीक: क्या भारत की परमाणु सुरक्षा खतरे में है?
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भारत के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा केंद्र कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़ी एक बड़ी सुरक्षा चूक सामने आई है। डार्क वेब पर वर्ल्ड लीक्स (World Leaks) नामक रैनसमवेयर हैकर ग्रुप ने इस प्लांट से संबंधित लगभग 19,000 अति संवेदनशील दस्तावेज लीक कर दिए हैं।

क्या है लीक हुए दस्तावेजों में? हैकर ग्रुप द्वारा जारी किए गए डेटा में पावर प्लांट के विभिन्न हिस्सों के ब्लूप्रिंट (नक्शे), प्लांट के सप्लायर्स की विस्तृत जानकारी, अधिकारियों के बीच हुई गुप्त मीटिंग्स, इंस्पेक्शन रिकॉर्ड्स, उपकरणों का तकनीकी विवरण और बीमा पॉलिसियां शामिल हैं। ये दस्तावेज प्लांट की कार्यप्रणाली को समझने के लिए काफी संवेदनशील माने जा रहे हैं।

रिलायंस ग्रुप से जुड़ा है डेटा हैकर ग्रुप का दावा है कि ये दस्तावेज रिलायंस ग्रुप से जुड़े हैं, जो इस प्लांट में एक कॉन्ट्रैक्टर के तौर पर काम कर रहा है। रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर को 2018 में कुडनकुलम प्लांट की यूनिट 3 और 4 के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डिजाइन और निर्माण का ठेका मिला था। ये दोनों यूनिट्स अभी निर्माणाधीन हैं और 2027 तक इनके परिचालन में आने की उम्मीद है।

रिलायंस और डेटा सेंटर का पक्ष इस मामले पर रिलायंस ग्रुप ने स्वीकार किया है कि थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर सर्विस प्रोवाइडर योटा (Yotta) द्वारा होस्ट किए गए सर्वर पर उनके डेटा में आंशिक सेंध (partial breach) लगी है। कंपनी ने कहा है कि उन्होंने इस घटना की जानकारी सरकार को दे दी है। हालांकि, रिलायंस ने हैक किए गए डेटा की प्रकृति पर स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है।

कौन है ‘वर्ल्ड लीक्स’ हैकर ग्रुप? वर्ल्ड लीक्स एक कुख्यात रैनसमवेयर ग्रुप है। इससे पहले यह ग्रुप नाइकी (Nike) और भारत के टाटा ग्रुप जैसी बड़ी कंपनियों को भी अपना निशाना बना चुका है। हैकर ग्रुप ने रिलायंस के सर्वर से कुल 8.58 लाख फाइलें हासिल की थीं, जिनमें से ये 19,000 फाइलें सबसे अधिक चौंकाने वाली और संवेदनशील हैं।

भारत के लिए क्यों है यह चिंताजनक? तमिलनाडु में स्थित कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट देश का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की महत्वाकांक्षी योजनाओं का मुख्य केंद्र है। प्लांट की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होने से न केवल सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े हुए हैं, बल्कि भविष्य में होने वाली गतिविधियों पर भी जोखिम बढ़ गया है। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां इस डेटा लीक की गंभीरता की जांच कर रही हैं।

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