वाराणसी के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर और वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है। करीब 25 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली ये परियोजनाएं काशी के भविष्य को देखते हुए गेम चेंजर साबित होंगी।
यह परियोजना गंगा नदी के समानांतर बनने वाली एक छह-लेन की एलिवेटेड सड़क है। लगभग 46 किलोमीटर लंबी यह सड़क नेशनल हाईवे-19 (NH-19) को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ेगी। इसका मुख्य उद्देश्य शहर के अंदरूनी हिस्सों और बाहरी क्षेत्रों के बीच आवाजाही को निर्बाध बनाना है।
वर्तमान में भारी ट्रैफिक के कारण शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुँचने में घंटों लग जाते हैं। इस कॉरिडोर के बनने के बाद अस्सी घाट, मणिकर्णिका घाट, नमो घाट और काशी विश्वनाथ धाम जैसे प्रमुख स्थलों तक पहुँचना बेहद आसान हो जाएगा। जो सफर अभी 60 मिनट लेता है, वह महज 20 मिनट में पूरा हो सकेगा।
इस कॉरिडोर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वाहन 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि ईंधन की खपत भी कम होगी। कॉरिडोर शहर के स्थानीय ट्रैफिक को बाहर के भारी वाहनों से अलग कर देगा, जिससे सड़क दुर्घटनाओं और जाम की समस्या में भारी कमी आएगी।
इन परियोजनाओं के जरिए वाराणसी का संपर्क प्रयागराज, जौनपुर, लखनऊ, गाजीपुर, चंदौली, मिर्जापुर और बिहार की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों से और अधिक मजबूत हो जाएगा। इससे व्यापार, पर्यटन और माल ढुलाई की गति बढ़ेगी, जिसका सीधा लाभ पूर्वांचल के विकास को मिलेगा।
कैबिनेट बैठक में सड़क परियोजनाओं के साथ-साथ सेमीकॉन मिशन 2.0 को भी मंजूरी दी गई है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक चिप निर्माण केंद्र के रूप में विकसित करना है। डिजिटल और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में लिए गए ये फैसले भारत को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं।
गंगा और वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर केवल सड़क मार्ग नहीं हैं, बल्कि यह वाराणसी को एक आधुनिक स्मार्ट सिटी बनाने की नींव हैं। आने वाले समय में ये परियोजनाएं काशी को न केवल धार्मिक पर्यटन बल्कि आर्थिक केंद्र के रूप में और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाएंगी।
*#WATCH | Union Minister Ashwini Vaishnaw says, If we consider the most complex manufacturing process in human civilisation, it is semiconductor manufacturing... Then comes the ATMP: extracting the tiny chip... Following that, we have the integration of bare components—passive… pic.twitter.com/cyZotcLT4o
— ANI (@ANI) July 15, 2026
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