राम मंदिर चंदे पर विवादित बोल: पहले उड़ाया मजाक, अब सतीश महाना ने दी सफाई
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उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता सतीश महाना अपने एक हालिया बयान के बाद सियासी घेरे में आ गए हैं। राम मंदिर के लिए दिए गए चंदे में चोरी के मामले पर उनकी टिप्पणी ने विपक्ष को हमलावर होने का मौका दे दिया है।

क्या था विवादित बयान?

राम मंदिर चंदे में चोरी की खबरों पर जब सतीश महाना से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसे बेहद हल्के अंदाज में लिया। उन्होंने कहा, जिनका पैसा चोरी हुआ है, मुझे लगता है कि उन्होंने शायद श्रद्धा भाव के साथ दान नहीं किया था। इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उनकी तीखी आलोचना हुई।

दान के बाद कोई पैसा मांगता है क्या?

विवाद बढ़ता देख सतीश महाना ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि दान देने के बाद कोई उसे वापस नहीं मांगता। उन्होंने कहा, इतने बड़े मंदिर के निर्माण में मेरा भी योगदान है। अगर कोई व्यक्ति दान देने के बाद अपना पैसा वापस मांग रहा है, तो इस पर मैं क्या कहूं? हम उन लोगों को पैसा वापस करने के लिए भी तैयार हैं।

संस्था पर सवाल उठाना गलत

महाना ने स्पष्ट किया कि चोरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, उन्होंने जोर दिया कि किसी एक घटना के आधार पर पूरी संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि देश के हर संस्थान में कहीं न कहीं गड़बड़ी होती रही है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि पूरी व्यवस्था पर उंगली उठाई जाए।

विपक्ष का जोरदार पलटवार

सतीश महाना के बयान पर समाजवादी पार्टी ने कड़ा रुख अपनाया है। सपा नेता आशुतोष वर्मा ने इसे हास्यास्पद और करोड़ों लोगों की आस्था का अपमान बताया।

सपा नेता ने तंज कसते हुए कहा, क्या विधानसभा अध्यक्ष ने आस्था की कोई GPS ट्रैकिंग लगाई थी? मंदिर में चोरी हुई है और आप कह रहे हैं कि दान आस्था से नहीं दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से ऐसी गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी की उम्मीद नहीं थी।

पुरानी रंजिश पर भी बोले महाना

सतीश महाना ने यह भी कहा कि आज वे लोग ज्यादा चिंतित हैं, जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन के दौरान कुछ नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग कभी जय श्री राम बोलने से कतराते थे या मंदिर की जगह शौचालय बनाने की बात करते थे, आज वही लोग चोरी के मुद्दे पर शोर मचा रहे हैं।

फिलहाल, इस बयानबाजी ने यूपी की राजनीति में एक नया विवाद छेड़ दिया है, जहां एक ओर सत्ता पक्ष इसे पवित्र कार्य में बाधा बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे आस्था की लूट करार दे रहा है।

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