राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट सख्त, ट्रस्ट और सरकार को थमाया नोटिस
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अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और हेराफेरी के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपना लिया है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को इस मामले में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

SIT से मांगी सीलबंद रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच कर रही उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच टीम (SIT) को निर्देश दिया है कि वह जांच की प्रगति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश करे। इस मामले की अगली सुनवाई अब 20 अगस्त को होगी।

तुषार मेहता की अपील खारिज सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र और यूपी सरकार की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया कि ट्रस्ट को नोटिस न भेजा जाए, लेकिन पीठ ने उनकी इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट को भी इस मामले में अपना पक्ष रखना होगा।

सीसीटीवी और सबूतों के संरक्षण की मांग याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कोर्ट से आग्रह किया कि मंदिर के सीसीटीवी फुटेज और अन्य संबंधित रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि उन्हें जांच रिपोर्ट की कॉपी दी जाए। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल स्टेटस रिपोर्ट याचिकाकर्ताओं को देने से इनकार कर दिया है और कहा कि इस पर बाद में विचार किया जाएगा।

कई याचिकाओं पर हो रही सुनवाई यह मामला अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी, अजय कुमार राय और राजद सांसद सुधाकर सिंह द्वारा दायर अलग-अलग याचिकाओं पर आधारित है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि मंदिर में आने वाले दान का प्रबंधन पारदर्शी नहीं है और इसमें गंभीर अनियमितताएं बरती गई हैं।

क्या है याचिकाकर्ताओं का तर्क? याचिकाओं में मांग की गई है कि राम मंदिर के दान प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही तय की जाए। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि मंदिर में चढ़ाया गया धन एक पवित्र न्यास संपत्ति है, जिसका प्रबंधन करने वाले ट्रस्टी अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं।

राजनीतिक गरमाई, AAP का कैंपेन इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस मामले को लेकर देशव्यापी सिग्नेचर कैंपेन चलाया है। पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह राम भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अब सबकी निगाहें 20 अगस्त को होने वाली सुनवाई और SIT की स्टेटस रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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