मिडिल ईस्ट में महायुद्ध: ईरान-अमेरिका के ताबड़तोड़ हमलों से दहल उठा खाड़ी क्षेत्र
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ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनाव अब एक पूर्णकालिक संघर्ष में बदल चुका है। सैटेलाइट से मिली हालिया तस्वीरें इस बात की गवाही दे रही हैं कि दोनों देशों के बीच हुई जवाबी कार्रवाई के बाद खाड़ी क्षेत्र में तबाही का मंजर है। अब दावों के बजाय सबूत सामने आ रहे हैं।

अमेरिकी ठिकानों पर ईरान का मिसाइल प्रहार

ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया। सैटेलाइट इमेजरी के मुताबिक, जॉर्डन के प्रिंस हसन एयर बेस में MQ-4C ट्राइटन ड्रोन का हैंगर पूरी तरह जमींदोज हो गया है।

इसके अलावा, कतर के अल-उदैद एयर बेस के हैंगर और बहरीन में स्थित अमेरिकी 5वीं फ्लीट के हेडक्वार्टर के पास बनी स्टोरेज फैसिलिटी को भी भारी नुकसान पहुंचा है। ईरान ने इन हमलों के लिए अपनी सटीक बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है।

अमेरिका ने ईरान के परमाणु संयंत्र के करीब किया हमला

जवाब में अमेरिका ने ईरान के भीतर सैन्य ठिकानों, मिसाइल साइटों और कमांड सेंटर्स पर हमला किया। सबसे डरावनी तस्वीर बूशहर परमाणु संयंत्र से आई है। यहां मुख्य रिएक्टर के बेहद करीब एक बिल्डिंग पूरी तरह नष्ट हो गई है।

परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने पहले ही चेतावनी दी थी कि ऐसे किसी भी हमले से रेडियोलॉजिकल आपदा का खतरा पैदा हो सकता है, जिससे न केवल ईरान बल्कि पड़ोसी देश भी प्रभावित हो सकते हैं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना जंग का केंद्र

यह तनाव 2026 की शुरुआत में तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के परमाणु प्रोग्राम पर हमले किए। अब संघर्ष का मुख्य कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है, जहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। ईरान इस महत्वपूर्ण मार्ग पर अपना नियंत्रण चाहता है, जिसे अमेरिका अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत खुला रखना चाहता है।

वैश्विक सुरक्षा पर मंडराया संकट

इस युद्ध के नतीजे अब वैश्विक स्तर पर महसूस किए जा रहे हैं:

कूटनीति की राह कठिन

सैटेलाइट तस्वीरें यह साफ कर रही हैं कि अब युद्ध झूठ की ओट में नहीं छिपाया जा सकता। हालांकि, दोनों देश कूटनीतिक बातचीत की बात तो कर रहे हैं, लेकिन आपसी अविश्वास और क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई किसी भी समझौते की राह में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। फिलहाल, पूरी दुनिया इस जलते हुए क्षेत्र पर नजर गड़ाए बैठी है, क्योंकि एक छोटी सी चूक बड़े पैमाने पर मानवीय और आर्थिक तबाही ला सकती है।

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