सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर गहराया संकट दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले तीन सप्ताह से जारी विरोध प्रदर्शन अब एक नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है। नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर मशहूर शिक्षाविद सोनम वांगचुक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उनकी गिरती सेहत को लेकर समर्थकों में गहरी चिंता व्याप्त है।
आराम की जिंदगी छोड़ देश के भविष्य के लिए संघर्ष कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ दास ने एक भावुक ओपन लेटर लिखकर देश की अंतरात्मा को झकझोरा है। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक, जिन्होंने रेमन मैग्सेसे पुरस्कार जैसे सम्मान देश को दिलाए, आज एक भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। सौरभ ने कहा, वह एक ऐसे व्यक्ति हैं जो आराम और शोहरत चुन सकते थे, लेकिन उन्होंने हमारे बच्चों के भविष्य को चुना।
उदासीनता पर तीखा प्रहार पत्र में दास ने भारतीय नागरिकों की चुप्पी पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा कि हमने दुख और अन्याय के तमाशे का आदी होकर अपनी संवेदनाएं खो दी हैं। जहां आक्रोश होना चाहिए था, वहां हमने चुप्पी साध ली है। उन्होंने कहा, यह भारत नहीं है, जिसे हम अपनी नजरों में देखते थे। यह चिंताजनक है कि एक प्रतिष्ठित व्यक्ति को अपनी बात मनवाने के लिए खुद को भूखा रखकर मरना पड़ रहा है।
इतिहास की अदालत में हम बेनकाब होंगे सौरभ दास ने चेतावनी दी कि यदि नागरिक अब भी नहीं जागे, तो इतिहास इस बात का गवाह बनेगा कि हमने क्या खोया। उन्होंने लिखा, इतिहास यह नहीं पूछेगा कि सोनम वांगचुक ने भारत के लिए क्या किया, बल्कि यह पूछेगा कि जब सोनम वांगचुक को भारत की जरूरत थी, तब भारत ने क्या किया। 20 जुलाई को इस आंदोलन के समर्थन में एक निर्णायक पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।
क्या है मामला और क्यों हो रहा प्रदर्शन? कॉकरोच जनता पार्टी का जन्म अदालती टिप्पणियों के विरोध में हुआ था, जिसने बाद में शिक्षा प्रणाली की जवाबदेही के लिए बड़ा मंच ले लिया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर डेरा डाले कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को बाधित करने की साजिशें रची जा रही हैं। फिलहाल, पूरा देश सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य और इस आंदोलन के भविष्य पर अपनी नजरें टिकाए हुए है।
#SOS: To every Indian,
— Saurav Das (@SauravDassss) July 12, 2026
Things are looking grimmer by the day.
I don’t know how much longer Sonam sir can hold on. He keeps telling us he can. But those of us sitting beside him are terribly worried.
This is a man who could have chosen a life of comfort and recognition.… pic.twitter.com/52WzkSv08Z
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