कोलकाता एयरपोर्ट: 136 साल पुरानी मस्जिद और सुरक्षा का गंभीर संकट, जानें आखिर क्यों बंद हुई नमाज?
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कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट परिसर में स्थित 136 साल पुरानी गौरीपुर जामा मस्जिद (बांकुड़ा मस्जिद) एक बार फिर चर्चा में है। एयरपोर्ट अधिकारियों ने सुरक्षा चिंताओं के चलते फिलहाल यहां नमाज पर रोक लगा दी है। आइए समझते हैं इस विवाद से जुड़ी मुख्य वजहें।

क्यों बंद हुई नमाज? फिलहाल मस्जिद का नवीनीकरण (रिनोवेशन) कार्य चल रहा है, जिसके चलते अधिकारियों ने तीन दिनों के लिए यहां नमाज पर रोक लगाई है। हालांकि, यह महज एक शुरुआत है, क्योंकि मस्जिद की लोकेशन को लेकर लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियां और प्रशासन गंभीर हैं।

लेवल-3 सिक्योरिटी जोन में है मस्जिद विवाद की जड़ मस्जिद की वर्तमान स्थिति है। यह मस्जिद अब एयरपोर्ट के लेवल-3 सिक्योरिटी जोन में आती है, जो सबसे संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। यह इलाका दूसरे रनवे से महज 300 मीटर की दूरी पर स्थित है। यहीं से प्रधानमंत्री और अन्य वीवीआईपी की एंट्री होती है।

पास की प्रक्रिया से सुरक्षा को खतरा स्थानीय भाजपा विधायक सौरव सिकदर और अन्य सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि मस्जिद में नमाज पढ़ने जाने वाले लोगों को आधार कार्ड के आधार पर प्रवेश पास दिया जाता है। इसमें पासपोर्ट या व्यापक पृष्ठभूमि जांच की प्रक्रिया नहीं होती। संवेदनशील एयरपोर्ट क्षेत्र में बाहरी लोगों की इतनी आसान पहुंच को सुरक्षा के लिहाज से बहुत बड़ा खतरा माना जा रहा है।

1890 से एयरपोर्ट तक का सफर यह मस्जिद 1890 के दशक में बनी थी, जब वहां कोई एयरपोर्ट नहीं था। 1924 में अंग्रेजों ने यहां एयरडोम बनाया और बाद में 1962 में विस्तार के दौरान गांव के हिस्से को अधिग्रहित किया गया। तब मस्जिद को शिफ्ट नहीं करने का फैसला लिया गया था, जो आज सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक बड़ी पहेली बन गई है।

शिफ्टिंग पर सहमति की उम्मीद फिलहाल मस्जिद कमेटी और प्रशासन के बीच बातचीत जारी है। एयरपोर्ट अथॉरिटी मस्जिद को परिसर के बाहर शिफ्ट करने की योजना पर काम कर रही है। समिति ने भी किसी स्थायी समाधान के लिए सहयोग देने की बात कही है, ताकि धार्मिक आस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बना रहे।

नेताओं के बयान और रुख इस मसले पर राजनीति भी तेज है। पूर्व मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी का कहना है कि प्रशासन को बातचीत के बीच नमाज पर रोक लगाने की जरूरत नहीं थी। वहीं, दूसरी ओर शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि चीन और बांग्लादेश की सीमा के करीब स्थित इस एयरपोर्ट को बाहरी लोगों के लिए खुला नहीं छोड़ा जा सकता।

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