दतिया में भावुक हुए नरोत्तम मिश्रा: नामांकन रैली में रो पड़े पूर्व गृह मंत्री, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने थामा हाथ
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मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए सोमवार का दिन राजनीतिक सरगर्मी से भरा रहा। भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के नामांकन के दौरान आयोजित रैली में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का एक अलग ही रूप देखने को मिला। मंच पर मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी में वे अचानक भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।

मंच पर भावुक हुए नरोत्तम मंच पर मुख्यमंत्री मोहन यादव उनके साथ बैठे थे। जैसे ही नरोत्तम मिश्रा ने पार्टी के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की, वे खुद को रोक नहीं पाए। अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा, पार्टी ने मुझे 30 साल तक विधायक और 15 साल तक मंत्री बनाकर बहुत कुछ दिया है। यह कहते हुए ही वे रो पड़े। भावुक होते देख मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तुरंत उनका हाथ थाम लिया और उन्हें ढांढस बंधाया।

टिकट न मिलने का मलाल या पार्टी के प्रति निष्ठा? दतिया सीट से टिकट न मिलने के बाद पहली बार ऐसा मौका आया जब नरोत्तम मिश्रा ने इस पर खुलकर बात की। उन्होंने अपने समर्थकों से शांत रहने की अपील करते हुए कहा, हो सकता है मुझमें ही कोई कमी रह गई हो। गौरतलब है कि टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों ने काफी विरोध प्रदर्शन किया था, जिसे अब वे शांत कराने की कोशिश कर रहे हैं।

विपक्ष पर तीखा हमला नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि दतिया में राजा और रंक की लड़ाई है। उन्होंने दिग्विजय सिंह पर निशाना साधते हुए कहा, वे मुझे रावण कहते हैं क्योंकि मैं चुनाव हार गया, जबकि खुद सवा तीन लाख वोटों से हारने वाले दिग्विजय सिंह उन्हें संस्कारी लगते हैं? उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह को चांदी की चम्मच लेकर पैदा होने वाला बताकर घेरा।

मुख्यमंत्री ने किया नेतृत्व का समर्थन मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नरोत्तम मिश्रा की सराहना करते हुए कहा, नरोत्तम जी, आशुतोष आपके ही नेतृत्व में चुनाव लड़ने आया है। सीएम ने उन्हें अपना पुराना मित्र बताते हुए कहा कि भाजपा में कोई फूट नहीं है, बल्कि कांग्रेस के भीतर अंतरकलह मची हुई है। उन्होंने दतिया के मतदाताओं को कांग्रेस के षड्यंत्र से सावधान रहने की नसीहत दी।

राजनीतिक संदेश दतिया के कद्दावर नेता माने जाने वाले नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटना भाजपा के लिए एक बड़ा फैसला था। अब उन्हें पार्टी प्रत्याशी के साथ खड़ा देखकर यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि भाजपा एकजुट होकर उपचुनाव में उतरने की रणनीति बना रही है। नरोत्तम मिश्रा का यह भावुक होना उनके समर्थकों को एकजुट करने और पार्टी के प्रति निष्ठा दिखाने का एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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