दतिया में भाजपा का महा-विद्रोह : नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटते ही सड़क पर उतरे कार्यकर्ता, सामूहिक इस्तीफों से संगठन ध्वस्त
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दतिया: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा के साथ ही भाजपा के भीतर संगठनात्मक तूफान आ गया है। पार्टी द्वारा पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद दतिया की सड़कों पर बगावत की आग भड़क उठी है।

सड़कों पर सन्नाटा, हाईवे पर कब्जा टिकट वितरण से नाराज कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया है। दतिया के मुख्य बाजारों में दुकानें बंद करा दी गई हैं। आक्रोशित समर्थकों ने मुख्य हाईवे को टायर जलाकर पूरी तरह जाम कर दिया है और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह निर्णय जमीनी कार्यकर्ताओं का अपमान है।

संगठन का आत्मघाती कदम इस बगावत की आंच भाजपा की जिला इकाई तक पहुंच गई है। दतिया जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह ने इसे एकतरफा फैसला बताते हुए इस्तीफा दे दिया है। उनके साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, नगर पालिका अध्यक्ष, सभी मंडलों के अध्यक्ष और 281 बूथों की कार्यकारिणी ने अपने पदों से इस्तीफा देकर नेतृत्व को हिलाकर रख दिया है।

24 घंटे का अल्टीमेटम बागी कार्यकर्ताओं ने पार्टी हाईकमान को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि डॉ. नरोत्तम मिश्रा को दोबारा प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया, तो ये सभी कार्यकर्ता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे देंगे। समर्थकों का तर्क है कि पिछले 15 वर्षों में मिश्रा ने दतिया का विकास किया है, जबकि नए प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को जनता पहचानती तक नहीं है।

क्यों बदला गया चेहरा? साल 2023 के चुनाव में नरोत्तम मिश्रा को कांग्रेस के राजेंद्र भारती से हार का सामना करना पड़ा था। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इसी हार के फीडबैक और आंतरिक सर्वे रिपोर्ट के आधार पर हाईकमान ने चेहरा बदलने का जोखिम लिया है। नए प्रत्याशी आशुतोष तिवारी संघ के पुराने सिपाही माने जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका विरोध भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

क्या अब भीतरघात की बारी? कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द होने के बाद उप चुनाव की स्थिति बनी थी, लेकिन अब यह मुकाबला भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि दिल्ली दरबार ने अपना फैसला नहीं बदला, तो नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों द्वारा की जाने वाली भीतरघात (पार्टी के भीतर ही नुकसान पहुंचाना) भाजपा को सत्ता से दूर धकेल सकती है। अब देखना यह है कि क्या भाजपा आलाकमान दतिया में अपनी साख बचाने के लिए झुकता है या किसी नए मास्टरस्ट्रोक का सहारा लेता है।

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