ईरान के साथ सीजफायर खत्म: ट्रंप के कड़े तेवर से पश्चिम एशिया में छिड़ा नया संग्राम
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अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि ईरान के साथ हुआ अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) अब प्रभावी नहीं है। ट्रंप के इस आक्रामक रुख ने पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध के काले बादल गहरा दिए हैं।

समझौते का उल्लंघन और ट्रंप की नाराजगी नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने ईरान पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि तेहरान ने समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया है। ट्रंप ने कहा, मेरे लिए यह सब खत्म हो चुका है। मैं उनसे कोई बातचीत नहीं करना चाहता, वे बीमार मानसिकता के लोग हैं। ट्रंप का मानना है कि समझौते के बाद ईरान द्वारा दिए गए बयानों ने विश्वास की नींव को ही ढहा दिया है।

ईरान का दावा: 85 अमेरिकी ठिकानों पर हमला तनाव के बीच ईरान ने एक बड़ा दावा कर सनसनी फैला दी है। ईरानी प्रशासन का कहना है कि उसने महशहर बंदरगाह पर हुए हमलों का बदला लेने के लिए 85 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। हालांकि, इन दावों की किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था ने पुष्टि नहीं की है, लेकिन दोनों देशों के बीच छिड़ी इस शब्द-युद्ध की जंग ने स्थिति को बेहद विस्फोटक बना दिया है।

खाड़ी देशों में हाई अलर्ट ईरानी दावों के बाद बहरीन, कुवैत और अन्य खाड़ी देशों में सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। संभावित हवाई हमलों के डर से चेतावनी प्रणालियों को सक्रिय कर दिया गया है। संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है और सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। क्षेत्र के लोगों में भी तनाव और डर का माहौल देखा जा रहा है।

क्या कूटनीति के रास्ते बंद हो गए हैं? ट्रंप के इस बयान ने भविष्य के कूटनीतिक रास्तों पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जो समझौता परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय शांति के लिए उम्मीद की किरण बना था, वह अब पूरी तरह बेअसर नजर आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संवाद के दरवाजे बंद होते हैं, तो सैन्य विकल्प ही एकमात्र रास्ता बच सकता है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया संकट पश्चिम एशिया में अशांति का सीधा असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। यदि तनाव और बढ़ता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों से होने वाला तेल का व्यापार बाधित हो सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट आने की आशंका है, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ना तय है।

अब आगे क्या? फिलहाल दोनों देशों के बीच जुबानी जंग जारी है। दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कोई तीसरा पक्ष बीच-बचाव करेगा या यह संघर्ष व्यापक सैन्य टकराव में बदल जाएगा। आने वाले कुछ दिन वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता के लिहाज से बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।

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