पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल (E-20) मिलाने की नीति इन दिनों देश में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। जहां एक तरफ केंद्र सरकार इसे आत्मनिर्भरता और किसानों की आय बढ़ाने का जरिया बता रही है, वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो और तकनीकी चिंताओं ने बहस को और हवा दे दी है।
क्या कहा था मणिशंकर अय्यर ने? सोशल मीडिया पर पूर्व पेट्रोलियम मंत्री मणिशंकर अय्यर का 2005 का एक संसदीय भाषण तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें वे तत्कालीन सरकार की एथेनॉल नीति पर बात करते हुए चुटकी भरे अंदाज में कहते हैं, शराब कम पिएं, हमें वही एथेनॉल पेट्रोल में मिलाना है। उन्होंने स्पष्ट किया था कि जब एथेनॉल की उपलब्धता बढ़ेगी, तो उसे ईंधन में मिश्रण के तौर पर प्राथमिकता दी जाएगी। उनका यह पुराना तर्क आज की बहस में नए संदर्भों के साथ फिर से जीवित हो उठा है।
ईंधन मिश्रण और सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप एथेनॉल मिश्रण से वाहनों के प्रदर्शन और माइलेज पर पड़ने वाले असर को लेकर आम लोगों के साथ-साथ कानूनी गलियारों में भी सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। केंद्र सरकार ने अदालत को सूचित किया है कि E-20 कार्यक्रम अभी मूल्यांकन के चरण में है और अगले साल तक इसके प्रभावों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस फैसले पर यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने के आदेश दिए हैं, जिसमें तेल कंपनियों को एथेनॉल आवंटन बढ़ाने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट की न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ इस पूरे मामले की निगरानी कर रही है।
एथेनॉल से हटकर अब हाइड्रोजन की ओर नजरें एथेनॉल पर जारी घमासान के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भविष्य की दिशा तय कर दी है। गडकरी का मानना है कि हाइड्रोजन तकनीक भविष्य के परिवहन का गेमचेंजर साबित होगी। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में देश की सड़कों पर हाइड्रोजन से चलने वाली बसें और ट्रक दौड़ते दिखाई देंगे।
नागपुर में पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत गडकरी ने बताया कि टाटा मोटर्स के साथ मिलकर हाइड्रोजन ट्रकों का परीक्षण शुरू किया जा चुका है। इसमें फ्यूल सेल और मॉडिफाइड इंटरनल कंबशन इंजन दोनों का उपयोग हो रहा है। इसके अलावा, नागपुर में हाइड्रोजन आधारित बस सेवा का एक पायलट प्रोजेक्ट भी चल रहा है, जहां स्थानीय स्तर पर ईंधन तैयार कर बसों का संचालन किया जा रहा है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि स्वच्छ ईंधन के लिए भविष्य में हमें एथेनॉल के साथ-साथ हाइड्रोजन जैसे विकल्पों को पूरी तरह अपनाना होगा।
*“शराब कम पिया करो, हमें वही एथनॉल पेट्रोल में मिलाना है”
— ANUPAM MISHRA (@scribe9104) July 7, 2026
~ मणिशंकर अय्यर, पेट्रोलियम मंत्री, 2005 pic.twitter.com/lQEaQd9uxe
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