शराब कम पियो, पेट्रोल में एथेनॉल मिलाना है : मणिशंकर अय्यर का 22 साल पुराना वीडियो क्यों मचा रहा खलबली?
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पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण पर छिड़ी बहस भारत सरकार की पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने (E20) की नीति इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। सरकार का तर्क है कि इससे तेल आयात पर निर्भरता घटेगी और प्रदूषण कम होगा। वहीं, आम कार मालिकों में डर है कि एथेनॉल के कारण उनके वाहनों के इंजन और फ्यूल टैंक खराब हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

2005 का वो वायरल वीडियो इस विवाद के बीच मनमोहन सरकार में पेट्रोलियम मंत्री रहे मणिशंकर अय्यर का 2005 का एक संसद भाषण सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें अय्यर ने कहा था, हम चीनी मिलों से बात कर चुके हैं, पेट्रोल और एथेनॉल का मिश्रण होकर रहेगा। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा था, शराब कम पिया करो, हमें वही एथेनॉल पेट्रोल में मिलाना है। शराब बनाने के बाद जो बचता है, वही हमारे पास पहुंचता है।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला मामले की गंभीरता को देखते हुए अब यह सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। केंद्र सरकार ने कोर्ट को स्पष्ट किया है कि E20 अभी प्रायोगिक चरण (Experimental Phase) में है और इसका वास्तविक असर अगले साल तक स्पष्ट होगा। सुप्रीम कोर्ट ने भारत पेट्रोलियम (BPCL) की याचिका पर कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है, जिसमें तेल कंपनियों को एथेनॉल आवंटन पर पुनर्विचार करने को कहा गया था।

हाइड्रोजन की ओर बढ़ रहे कदम एक तरफ एथेनॉल पर बहस जारी है, वहीं केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भविष्य की नई राह दिखाई है। गडकरी ने घोषणा की है कि जल्द ही देश की सड़कों पर हाइड्रोजन से चलने वाले ट्रक और बसें दौड़ती नजर आएंगी। उन्होंने कहा कि उनका फोकस अब भारी व्यावसायिक वाहनों (Commercial Vehicles) को पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर है।

गडकरी का ग्रीन विजन नितिन गडकरी ने बताया कि वे खुद इलेक्ट्रिक, फ्लेक्स-फ्यूल और हाइड्रोजन तीनों तरह की कारें इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने दावा किया कि टाटा के हाइड्रोजन ट्रकों का परीक्षण सफल रहा है और नागपुर में हाइड्रोजन बस के लिए पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू हो चुका है। सरकार का मानना है कि वैकल्पिक ईंधन ही भविष्य में देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाएगा।

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