फीफा वर्ल्ड कप में सियासी घमासान: ट्रंप की एंट्री से पलटा रेड कार्ड, बालोगुन को मिली बड़ी राहत
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फीफा वर्ल्ड कप 2026 में इस वक्त फुटबॉल से ज्यादा सियासत की चर्चा हो रही है। टूर्नामेंट के नॉकआउट दौर के बीच अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन पर लगा एक मैच का बैन अचानक हटा दिया गया है। इस फैसले के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दखल बताया जा रहा है, जिसने फुटबॉल जगत में बवाल मचा दिया है।

क्या है फीफा का आर्टिकल 27 ? बालोगुन को बोस्निया-हर्जेगोविना के खिलाफ मैच में एक गंभीर फाउल के लिए सीधा रेड कार्ड दिखाया गया था। सामान्य नियमों के तहत, रेड कार्ड मिलने पर खिलाड़ी स्वतः ही अगले मैच से बाहर हो जाता है और इसके खिलाफ अपील का कोई प्रावधान नहीं होता। हालांकि, फीफा ने अपने डिसिप्लिनरी कोड के आर्टिकल 27 का इस्तेमाल किया। इसके तहत फीफा की न्यायिक समिति किसी भी अनुशासनात्मक कार्रवाई को निलंबित करने का विशेष अधिकार (Veto Power) रखती है।

प्रोबेशनरी पीरियड पर खेलने की इजाजत फीफा ने बालोगुन के बैन को अभी के लिए सस्पेंड करते हुए उसे एक साल के प्रोबेशनरी पीरियड पर डाल दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि बालोगुन 6 जुलाई को बेल्जियम के खिलाफ राउंड ऑफ 16 मैच में खेल सकेंगे। लेकिन, यदि अगले एक साल के भीतर उन्होंने दोबारा ऐसा कोई गंभीर फाउल किया, तो यह पुराना बैन उन पर तुरंत लागू हो जाएगा।

ट्रंप का फोन और फीफा का यू-टर्न रिपोर्ट्स के अनुसार, सजा पलटने का यह फैसला व्हाइट हाउस के दबाव में आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को फोन कर इस मामले पर पुनर्विचार करने को कहा था। वर्ल्ड कप के इतिहास में मैदान पर मिले रेड कार्ड के फैसले को इस तरह पलटना बेहद दुर्लभ है, जिसे लेकर अब फीफा पर सवाल उठ रहे हैं।

UEFA और बेल्जियम का कड़ा विरोध यूरोपीय फुटबॉल संघ (UEFA) और बेल्जियम फुटबॉल एसोसिएशन इस फैसले से खासे नाराज हैं। उनका मानना है कि राजनीतिक दबाव में नियम बदलना खेल की साख और ईमानदारी को चोट पहुँचाता है। बेल्जियम के कोच रूडी गार्सिया ने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता था कि फीफा दफ्तरों में 5 जुलाई को 1 अप्रैल (मजाक का दिन) मनाया जाता है।

रेड कार्ड: खेल पर कितना भारी पड़ता है? फुटबॉल के नियमों के मुताबिक, रेड कार्ड मिलने के बाद टीम को बाकी मैच 10 खिलाड़ियों के साथ ही खेलना पड़ता है और कोई सब्स्टीट्यूट भी नहीं आ सकता। आम तौर पर यह सजा बेहद सख्त होती है क्योंकि इससे पूरी टीम का संतुलन बिगड़ जाता है। अब देखना यह है कि क्या फीफा का यह विवादास्पद फैसला आने वाले मैचों में और अधिक तनाव पैदा करेगा या नहीं।

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