नाटो समिट से ठीक पहले यूक्रेन पर रूस का महा-हमला , 68 मिसाइल और 351 ड्रोन्स से मचाई तबाही
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कीव: नाटो की अहम शिखर बैठक से ठीक पहले रूस ने यूक्रेन पर अब तक का सबसे भीषण हमला किया है। 7 और 8 जुलाई को तुर्की के अंकारा में होने वाली नाटो समिट से पहले रूस ने 68 मिसाइलों और 351 ड्रोन्स के साथ यूक्रेन को दहला दिया है।

रिहायशी इलाकों में मौत का तांडव रूस के इन हमलों ने सीधे रिहायशी इमारतों को निशाना बनाया। इस हमले में अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 60 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मलबे के नीचे दबे लोगों को खोजने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने हमले से ठीक पहले बड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी, जो कुछ ही घंटों बाद सच साबित हुई।

पैट्रियट मिसाइलों की भारी कमी यूक्रेन ने माना है कि रूस की सभी बैलिस्टिक मिसाइलें निशाने पर लगी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि यूक्रेन के एयर डिफेंस सिस्टम में बड़ी खामियां हैं। यूक्रेन मुख्य रूप से अमेरिकी पैट्रियट सिस्टम पर निर्भर है, लेकिन मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण इनकी ग्लोबल सप्लाई सीमित हो गई है। जेलेंस्की नाटो की बैठक में इन इंटरसेप्टर मिसाइलों की मांग को प्रमुखता से उठा सकते हैं।

पुतिन-ट्रंप बातचीत और रूस की चाल यह हमला ऐसी स्थिति में हुआ है जब रूस के विदेश मंत्रालय ने खुलासा किया है कि 4 जुलाई को डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन के बीच 90 मिनट तक बातचीत हुई है। चर्चा है कि ट्रंप ने युद्ध में मध्यस्थता की इच्छा जताई है। जानकार मान रहे हैं कि वार्ता से पहले रूस यूक्रेन पर अधिकतम दबाव बनाना चाहता है ताकि वह बातचीत की मेज पर कमजोर स्थिति में रहे।

रूस का दावा और रणनीतिक स्थिति वहीं, रूस के रक्षा मंत्रालय ने सफाई दी है कि उन्होंने यूक्रेन की हथियार बनाने वाली फैक्टरियों, ड्रोन निर्माण इकाइयों और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया है। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह हमला हाल ही में यूक्रेन द्वारा रूस की सीमा के भीतर किए गए लंबी दूरी के हमलों का सीधा जवाब है।

युद्ध में बदलता गणित युद्ध विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के महीनों में यूक्रेन ने अपनी ड्रोन टेक्नोलॉजी से रूसी सप्लाई रूट्स को काफी नुकसान पहुंचाया है। हालांकि, अब रूस यूक्रेन की एयर डिफेंस सिस्टम की कमजोरी का फायदा उठाते हुए बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा है। आने वाले दिनों में नाटो की बैठक से यह साफ होगा कि पश्चिमी देश यूक्रेन की सुरक्षा के लिए अपनी हथियार आपूर्ति को किस हद तक पुनर्व्यवस्थित करते हैं।

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