खामेनेई का अंतिम सफर: तेहरान की सड़कों पर प्रतिशोध की दहाड़, अमेरिका-इजराइल के खिलाफ उबला जनसैलाब
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तेहरान: ईरान की राजधानी तेहरान आज एक ऐतिहासिक और तनावपूर्ण शोक का गवाह बनी। दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा के दौरान सड़कों पर लाखों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। इस जनसैलाब में केवल विदाई के आंसू ही नहीं, बल्कि अमेरिका और इजराइल के खिलाफ प्रतिशोध की आग भी साफ दिखाई दी।

ताबूत में साथ निकले परिजन खामेनेई का पार्थिव शरीर राष्ट्रीय ध्वज में लिपटा हुआ है। उनके ट्रक के साथ उन परिजनों के ताबूत भी रखे गए हैं, जो 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका के हवाई हमले में मारे गए थे। यह दृश्य ईरान के लिए एक बड़ा भावनात्मक और राजनीतिक संदेश है, जिसे तेहरान की सड़कों से मेहराबाद हवाई अड्डे तक ले जाया जा रहा है।

बदले की कसम खाकर उतरे लोग शोक सभा में शामिल आम नागरिकों का गुस्सा चरम पर है। फातिमा हसन जैसी प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे सिर्फ अंतिम विदाई के लिए नहीं, बल्कि बदला लेने का संकल्प लेकर आई हैं। जनता के इन नारों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ईरान में सत्ता और जनता के बीच की एकता फिलहाल अटूट है।

प्रशासनिक सख्ती और प्रभावित जनजीवन अंतिम यात्रा को देखते हुए तेहरान में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। शहर की प्रमुख सड़कों को बंद कर दिया गया है और हवाई क्षेत्र पर भी पाबंदियां लागू हैं। ईरान के सरकारी टेलीविजन के अनुसार, शनिवार से शुरू हुआ यह राष्ट्रीय शोक बृहस्पतिवार तक जारी रहेगा।

मशहद में सुपुर्द-ए-खाक होंगे खामेनेई अंतिम संस्कार की रस्में पूरी होने के बाद, 86 वर्षीय खामेनेई को उनके जन्मस्थान मशहद स्थित इमाम रज़ा दरगाह में दफन किया जाएगा। इस दौरान ईरान के शीर्ष नेताओं, जैसे संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची को भी भावुक और एकजुट देखा गया, जो देश के भीतर राजनीतिक स्थिरता का संदेश दे रहे हैं।

क्या ठंडे बस्ते में जाएगी वार्ता? एक तरफ अमेरिका ईरान के साथ परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे मुद्दों पर वार्ता को आगे बढ़ाना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ अंतिम संस्कार तक इन वार्ताओं के रुकने की संभावना है। जिस तरह से जनता और नेतृत्व बदले की बात कर रहे हैं, उससे संकेत मिल रहे हैं कि ईरान की आने वाली प्रतिक्रिया क्षेत्र के भू-राजनीतिक समीकरणों को बदल सकती है।

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