पुतिन के रूस में तेल का सूखा: पेट्रोल पाने के लिए 18 घंटे की कतार और गार्ड्स की तैनाती
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दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक कहे जाने वाला रूस आज खुद ईंधन के भारी संकट से जूझ रहा है। आलम यह है कि पेट्रोल पंपों पर तेल के लिए लोगों के बीच झड़पें हो रही हैं और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार को सुरक्षा गार्ड तैनात करने पड़ रहे हैं।

18 घंटे का लंबा इंतज़ार रूस के कई हिस्सों में फ्यूल पंपों के बाहर लंबी कतारें लगी हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि इरकुत्स्क जैसे शहरों में प्रशासन को पोर्टेबल टॉयलेट तक लगवाने पड़े हैं। एक रूसी महिला ने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें और उनके परिवार को तेल भरवाने के लिए 18 घंटे तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा।

यूक्रेन के सटीक हमले इस संकट के पीछे का मुख्य कारण यूक्रेन के ड्रोन हमले हैं। पिछले कुछ हफ्तों में, यूक्रेन ने रूस की गहरी सीमाओं में स्थित तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया है। नोरसी (NORSI) जैसी रूस की प्रमुख रिफाइनरियों पर हुए हमलों ने ईंधन उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित किया है।

बंद हो चुकी हैं 5 प्रमुख रिफाइनरियां ड्रोन हमलों के कारण रूस की कम से कम पांच बड़ी रिफाइनरियां काम करना बंद कर चुकी हैं। इनमें मॉस्को रिफाइनरी, वोल्गोग्राड, कुइबिशेव और टैनेको रिफाइनरी शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन रिफाइनरियों की मरम्मत में एक साल तक का समय लग सकता है, जिससे निकट भविष्य में भी राहत के आसार कम हैं।

ब्लैक मार्केटिंग और जमाखोरी ईंधन की कमी का फायदा उठाते हुए देश में कालाबाजारी भी शुरू हो गई है। हाल ही में क्रास्नोडार में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया, जिनके पास से 1,000 लीटर पेट्रोल बरामद हुआ। वे इसे ऊंची कीमतों पर बेचने की तैयारी में थे।

सरकार का क्या है रुख? रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्वीकार किया है कि ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों से मुश्किलें पैदा हो रही हैं। हालांकि, उन्होंने स्थिति को गंभीर नहीं बताया है। वहीं, उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक का कहना है कि मांग में 20 से 30% की बढ़ोतरी हुई है, जिसे पूरा करने के लिए लॉजिस्टिक्स को दुरुस्त किया जा रहा है। सरकार ने संकट को देखते हुए डीजल निर्यात पर रोक लगाने और कम गुणवत्ता वाले (सल्फर युक्त) ईंधन के उत्पादन को दिसंबर तक मंजूरी दी है।

क्या भारत से मदद ले रहा है रूस? एक समय रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदने वाला भारत अब रूस की मदद करता नजर आ रहा है। खबरों के अनुसार, भारत ने रूस को कम से कम 60 हजार मीट्रिक टन तेल भेजा है। वहीं, रूस बेला रूस सहित अन्य देशों से कुल 4 लाख टन तेल आयात करने की योजना बना रहा है, ताकि देश की 1.10 लाख टन प्रतिदिन की खपत को पूरा किया जा सके।

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