पानी भरने गई मां का पैर फिसला और पीछे छूट गए तीन मासूम, जैसलमेर से आई दिल दहला देने वाली खबर
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जैसलमेर: राजस्थान के जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ क्षेत्र से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है। घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए पानी भरने गई एक महिला की डिग्गी (जलाशय) में डूबने से मौत हो गई। इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह बिखेर कर रख दिया है।

पानी भरते समय कैसे हुआ हादसा? ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी महिलाएं घरेलू उपयोग के लिए डिग्गियों या सार्वजनिक जलाशयों पर निर्भर हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला डिग्गी से पानी निकाल रही थी, तभी अचानक उसका पैर फिसल गया। संतुलन बिगड़ने के कारण वह गहरे पानी में जा गिरी। जब तक आसपास के लोगों को भनक लगी और उसे बचाने की कोशिश की गई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

तीन मासूमों के सिर से उठा मां का साया इस घटना का सबसे दुखद पहलू महिला के तीन छोटे बच्चे हैं। मां की असमय मृत्यु ने इन बच्चों के सिर से न केवल सुरक्षा का साया छीन लिया है, बल्कि उनके भविष्य पर भी अनिश्चितता के बादल गहरा गए हैं। गांव के लोग बताते हैं कि बच्चे अभी इतने छोटे हैं कि उन्हें यह भी स्पष्ट नहीं है कि उनकी मां अब कभी लौटकर नहीं आएगी।

गांव में पसरा मातम घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मृतका बेहद मिलनसार और मेहनती थी। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में मातम का माहौल है और लोग शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाने का प्रयास कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रही त्रासदी को देखकर लोगों की आंखें नम हो रही हैं। नेटिजन्स सोशल मीडिया पर परिवार के प्रति संवेदना जाहिर कर रहे हैं और बच्चों की भविष्य के लिए आर्थिक मदद की अपील भी कर रहे हैं। हालांकि, प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, इसलिए इस मामले में तथ्यों की पुष्टि करना आवश्यक है।

सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल यह हादसा ग्रामीण इलाकों में जल स्रोतों के प्रति बरती जाने वाली लापरवाही पर बड़ा सवाल उठाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डिग्गियों के चारों ओर सुरक्षा रेलिंग, मजबूत प्लेटफॉर्म और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था हो, तो ऐसे हादसों को टाला जा सकता है।

सावधानी ही बचाव है सुरक्षा जानकारों की सलाह है कि खुले जलाशयों के पास अकेले जाने से बचें, खासकर मानसून के दौरान जब सतह फिसलन भरी होती है। गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को सतर्क रहने के लिए प्रेरित करना समय की मांग है। एक मां की मौत ने एक घर का चिराग बुझा दिया है, जो पूरे समाज के लिए एक गंभीर सीख है कि जीवन अनमोल है, सुरक्षा में चूक न करें।

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