जंतर-मंतर की अनसुनी पुकार: क्या पीएम मोदी के पास है छात्रों के 29 बलिदानों का जवाब?
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नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) परीक्षा में हुई धांधली को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन अब एक निर्णायक और चिंताजनक मोड़ पर पहुंच गया है। कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में जारी इस आंदोलन को आज 15 दिन पूरे हो गए हैं, लेकिन सरकारी गलियारों में सन्नाटा पसरा हुआ है।

अनशन का 8वां दिन और बढ़ता खतरा इस आंदोलन का सबसे गंभीर पहलू मशहूर सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक का आमरण अनशन है। वांगचुक समेत 25 प्रदर्शनकारी पिछले आठ दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। लगातार अनशन के कारण सोनम वांगचुक का वजन 5 किलोग्राम तक घट चुका है और उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है। इसके बावजूद, सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक संवाद स्थापित नहीं किया गया है।

29 छात्रों की मौत पर सरकार की चुप्पी कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ओपन लेटर लिखकर कड़े सवाल पूछे हैं। पत्र में दिए गए आंकड़े विचलित करने वाले हैं। जब 20 जून को आंदोलन शुरू हुआ था, तब परीक्षा परिणाम के तनाव में 11 छात्रों ने जान गंवाई थी। 15 दिनों के भीतर यह संख्या बढ़कर 29 हो गई है। दिपके ने सवाल किया है कि आखिर कब तक देश के युवा सरकारी उपेक्षा का शिकार होते रहेंगे।

शिक्षा मंत्री की बर्खास्तगी की मांग दिपके ने अपने पत्र में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की कार्यशैली पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने पूछा है कि राष्ट्रीय स्तर की इतनी बड़ी धांधली और 29 युवाओं की दुखद मौतों के बाद भी शिक्षा मंत्री को अब तक उनके पद से बर्खास्त क्यों नहीं किया गया? उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की है कि जिम्मेदारी तय करते हुए शिक्षा मंत्री को तुरंत हटाया जाए।

पुस्तकालय की तोड़फोड़ का आरोप आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पर मौजूद छात्रों द्वारा स्थापित एक अस्थायी लाइब्रेरी को लेकर भी बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अभिजीत दिपके का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने इस लाइब्रेरी में तोड़फोड़ की और महान नायकों—छत्रपति शिवाजी महाराज, डॉ. बी.आर. आंबेडकर और शहीद भगत सिंह—की पुस्तकों को अपमानजनक तरीके से फेंक दिया।

क्या लोकतंत्र में संवाद मर चुका है? अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री को याद दिलाया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में भूख हड़ताल सरकार पर नैतिक दबाव डालने का एक माध्यम होती है। सरकार की इस रहस्यमयी चुप्पी से प्रदर्शनकारियों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। दिपके का दावा है कि प्रशासन अपनी संवैधानिक जवाबदेही से पल्ला झाड़कर इस जन-आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल, जंतर-मंतर पर बैठे युवाओं की नजरें अब पीएम मोदी के रुख पर टिकी हैं।

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