40 की उम्र में छोड़ी नौकरी, 47 में बनीं डॉक्टर: जान्हवी की प्रेरणादायक कहानी
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सफलता की कहानियाँ अक्सर युवाओं के इर्द-गिर्द घूमती हैं, लेकिन जान्हवी अजीत राव ने यह साबित कर दिया है कि सपनों की कोई समय-सीमा नहीं होती। 18 साल तक सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नाम कमाने के बाद, उन्होंने उस पड़ाव पर नई शुरुआत की, जहाँ लोग रिटायरमेंट की सोचने लगते हैं।

इंजीनियरिंग से स्टार्टअप तक का सफर कैलिफोर्निया से इलेक्ट्रॉनिक्स में पढ़ाई करने वाली जान्हवी का करियर ग्राफ बेहद शानदार रहा। उन्होंने अमेरिका और भारत की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनियों में काम किया और अपना खुद का स्टार्टअप भी खड़ा किया। करीब दो दशक तक आईटी सेक्टर में सफलता का झंडा गाड़ने के बाद, जीवन ने एक अप्रत्याशित मोड़ लिया।

एक बीमारी बनी टर्निंग पॉइंट साल 2003 में जान्हवी को रूमेटॉइड आर्थराइटिस नामक ऑटोइम्यून बीमारी ने जकड़ लिया। इलाज के दौरान, डॉक्टरों द्वारा मरीजों की देखभाल और उनके जीवन को बेहतर बनाने की प्रक्रिया ने जान्हवी को गहराई से प्रभावित किया। यहीं उनके मन में डॉक्टर बनने का बीज अंकुरित हुआ।

40 की उम्र में उठाया जोखिम जहाँ लोग अपनी करियर की स्थिरता को संजोते हैं, वहीं जान्हवी ने 40 साल की उम्र में अपनी नौकरी छोड़ने का साहसी फैसला लिया। उनका लक्ष्य था—मेडिकल की पढ़ाई करना। 2013 में उन्होंने बेंगलुरु के एम.एस. रामैया मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया।

चुनौतियों को दी मात मेडिकल की पढ़ाई न केवल कठिन थी, बल्कि उम्र के इस पड़ाव पर युवा छात्रों के साथ प्रतियोगिता करना भी एक चुनौती थी। हालांकि, जान्हवी ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर अगले 8 सालों तक कड़ी मेहनत की और MBBS की डिग्री हासिल की।

एक नई शुरुआत: अमेरिका में डॉक्टर आज 47 साल की उम्र में जान्हवी अजीत राव अमेरिका में एक प्राइमरी केयर फिजिशियन के रूप में कार्यरत हैं। वे यहीं नहीं रुकीं, बल्कि अपनी मेडिकल स्किल्स को और बेहतर बनाने के लिए अब एम.डी. (MD) की पढ़ाई भी कर रही हैं।

जान्हवी की यह यात्रा उन सभी लोगों के लिए एक मिसाल है, जो उम्र या परिस्थितियों के डर से अपने अधूरे सपनों को दफन कर चुके हैं। उनका सफर हमें याद दिलाता है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो जिंदगी के किसी भी अध्याय को फिर से लिखा जा सकता है।

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