मधेपुरा: अपने ही घर में बेघर हुई 65 वर्षीय मां, बेटे-बहू पर कब्जे का आरोप और न्याय के लिए 5 साल का संघर्ष
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मधेपुरा: पुरैनी की रहने वाली 65 वर्षीय ममता शर्मा आज उस उम्र में न्याय की गुहार लगा रही हैं, जब उन्हें अपनों के सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत है। ममता शर्मा का आरोप है कि उनके ही बेटे और बहू ने जालसाजी कर उनके पैतृक घर और जमीन पर कब्जा कर लिया है। पिछले पांच सालों से वह सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

पति की मौत के बाद शुरू हुआ विवाद ममता शर्मा के अनुसार, पति प्रकाश शर्मा के निधन के बाद उनके हिस्से की संपत्ति का नामांतरण कथित तौर पर फर्जी पंचायतनामा और जाली हस्ताक्षरों के आधार पर करा लिया गया। बुजुर्ग महिला का आरोप है कि उनके बड़े बेटे अशोक शर्मा और बहू ने इस साजिश को अंजाम दिया और उन्हें अपने ही घर से बेदखल कर दिया।

दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा साबित मामले की गंभीरता को देखते हुए जब जांच हुई, तो उदाकिशुनगंज के भूमि सुधार उप समाहर्ता ने 2022 में स्पष्ट आदेश दिया कि पंचायतनामा पर किए गए हस्ताक्षर असली नहीं हैं। तत्कालीन पंचायत प्रतिनिधि ने भी लिखित रूप से स्वीकार किया कि उन्हें विश्वास में लेकर फर्जी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करवाए गए थे। इसके बावजूद, वृद्धा को संपत्ति का अधिकार नहीं मिला।

एसडीएम का आदेश भी बेअसर मामला माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण नियमावली, 2012 के तहत अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) के पास भी गया। सुनवाई के बाद प्रशासन ने आदेश दिया कि ममता शर्मा के बेटे उन्हें प्रतिमाह भरण-पोषण दें और बड़े बेटे को मां के रहने की समुचित व्यवस्था करने को कहा गया। हालांकि, पीड़िता का आरोप है कि स्थानीय पुलिस और अंचल कार्यालय से निर्देश के बाद भी उन्हें घर में प्रवेश नहीं मिला।

प्रशासनिक फाइलों में उलझा न्याय ममता शर्मा ने जिला पदाधिकारी से लेकर थाना स्तर तक गुहार लगाई है। 2024 में वन स्टॉप सेंटर ने भी संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर कार्रवाई का अनुरोध किया, लेकिन नतीजा शून्य रहा। ममता शर्मा अब प्रशासन से मांग कर रही हैं कि उन्हें उनके घर में रहने का अधिकार दिलाया जाए और सरकारी आदेशों का पालन न करने वाले दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

यह मामला न केवल पारिवारिक कलह, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों के सुरक्षा कवच पर भी बड़े सवाल खड़े करता है।

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