बलिया महिला अस्पताल में प्रमाण पत्र का काला कारोबार: मुफ्त सेवा के नाम पर वसूली का खेल
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बलिया जिला महिला अस्पताल एक बार फिर विवादों के घेरे में है। अस्पताल में जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए मरीजों और उनके परिजनों से अवैध वसूली का मामला सामने आया है। इस पूरे खेल का खुलासा तब हुआ, जब एक पीड़िता ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

वीडियो से खुला अवैध वसूली का राज सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में अस्पताल का एक कर्मचारी जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के एवज में खुलेआम 250 रुपये की मांग करता दिख रहा है। यह वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

लाखों का भ्रष्टाचार, छोटा-छोटा खेल स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल में यह गोरखधंधा वर्षों से चल रहा है। यदि औसतन एक दिन में 10 प्रमाण पत्र भी जारी किए जाते हैं, तो प्रतिदिन 2,500 रुपये की अवैध कमाई होती है। इस गणित से महीने का 75 हजार और साल भर में करीब 9 लाख रुपये का आंकड़ा बनता है। अनुमान है कि पिछले पांच वर्षों में यह भ्रष्टाचार 45 लाख रुपये के करीब पहुंच सकता है।

सरकारी सेवा मुफ्त, फिर जेब क्यों ढीली? सरकार द्वारा जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया पूरी तरह से निःशुल्क है। इसके बावजूद मरीजों से पैसे वसूले जाना सीधे तौर पर गरीब परिवारों के अधिकारों का हनन है। जब प्रक्रिया मुफ्त है, तो फिर अस्पताल के गलियारों में यह शुल्क किसे और क्यों दिया जा रहा है?

प्रशासन की सफाई और हकीकत जिला महिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ. राकेश चंद्रा का कहना है कि जन्म प्रमाण पत्र के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी इसमें संलिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ विभागीय और विधिक कार्रवाई की जाएगी।

क्यों दब जाती हैं बार-बार उठने वाली शिकायतें? अस्पताल में यह कोई पहली बार नहीं है जब भ्रष्टाचार की सुगबुगाहट हुई है। लोग बताते हैं कि शिकायतें तो कई बार की जाती हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने के कारण व्यवस्था जस की तस बनी रहती है। छोटी रकम होने के कारण कई लोग चुप्पी साध लेते हैं, जिसका फायदा उठाकर यह सिलसिला वर्षों से जारी है।

अब जांच पर टिकी निगाहें सवाल यह है कि अगर यह वसूली व्यक्तिगत स्तर पर हो रही थी, तो इतने वर्षों तक जिम्मेदार अधिकारियों को भनक क्यों नहीं लगी? क्या यह भ्रष्टाचार केवल एक कर्मचारी तक सीमित है या इसके तार कहीं और जुड़े हैं? फिलहाल, पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। अब देखना यह है कि यह जांच दोषियों को सजा दिलाती है या अन्य मामलों की तरह फाइलों में दफन हो जाती है।

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